Saturday, February 1, 2020

अब सरकार का जीवन अमृत बनेगा एलआईसी

}निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘निवेश क्लियरेंस सेल’

सरकार ने एलआईसी का आईपीओ लाकर फंड जुटाने का फैसला लिया है। इसके अलावा निजी पूंजी जुटाने के लिए आईडीबीआई बैंक के 46.46% शेयर की हिस्सेदारी खुदरा और संस्थागत निवेशकों को बेची जाएगी। अभी 51% हिस्सेदारी एलआईसी के पास है। पिछले साल सितंबर में ही सरकार ने 9300 करोड़ रुपए इक्विटी में लगाए थे। वित्तमंत्री ने यह नहीं बताया कि एलआईसी की कितनी हिस्सेदारी आईपीओ के जरिए बेची जाएगी। इस फैसले के जरिए सरकार की योजना 2.10 लाख करोड़ के महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य को हासिल करना है।

असरः तो एलआईसी मार्केट वैल्यूएशन के लिहाज से सबसे बड़ी कंपनी होगी

बाजार में सूचीबद्ध होते ही एलआईसी मार्केट वैल्यूएशन के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस से बड़ी कंपनी होगी। क्योंकि 2018 में एलआईसी की वैल्यूएशन सरप्लस या लाभ 48436 करोड़ रुपए था और संपत्ति करीब 36 लाख करोड़ की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। निवेश, ऋण विभागों और बेहतर प्रशासन को प्रोत्साहन मिलेगा। एलआईसी हर साल सरकारी प्रतिभूतियों और शेयर बाजारों में सबसे बड़ा निवेशक भी है। औसतन, एलआईसी हर साल शेयर बाजारों में 55,000 करोड़ रुपए से 65,000 करोड़ रुपए का निवेश करती है और भारतीय शेयरों में सबसे बड़ी इंवेस्टर भी है। 2017-18 के वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी ने डिबेंचर और बॉन्ड (434,959 करोड़ रुपए) में भारी निवेश किया है। इसके अलावा कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (मार्च 2018 तक 376,097 करोड़ रुपए) के लिए धन उपलब्ध कराया गया है।

स्टॉर्टअप की एबीसीडी

10 वर्ष तक लाभ पर 100 फीसदी छूट, नॉलेज ट्रांसलेशन क्लस्टर लगेंगे

वित्त मंत्री ने कहा- स्टार्टअप विकास के इंजन हैं। स्टार्टअप के टर्नओवर की लिमिट 25 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ करने का प्रस्ताव। 10 वर्ष तक लाभ पर 100 फीसदी छूट देने की योजना है। नए और उभरते हुए क्षेत्रों में नॉलेज ट्रांसलेशन क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो नवाचार पर जोर देगा।

टेक्सटाइल की फैशन डिजाइनिंग

1.1 लाख करोड़ के तकनीकी वस्त्र आयात रोकने के लिए 1480 करोड़

टेक्सटाइल में उत्पादन बढाने के लिए नेशनल टेक्सटाइल मिशन शुरू करने की योजना है। वर्तमान में देश 1.14 लाख करोड़ रुपए के तकनीकी वस्त्र का आयात करता हैै। इस स्थिति को बदलने के लिए यह मिशन शुरू किया जा रहा है। इस पर अगले 4 वर्ष में 1480 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इसके जरिए भारत इस सेक्टर में अग्रणी बनना चाहता है।

पावर सेक्टर का गृह विज्ञान

22 हजार करोड़ रु. दिए, 3 साल में हर घर में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा

रिन्यूबल और पावर सेक्टर के लिए 22 हजार करोड़ रखे गए हैं। पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर को अब 3 साल में प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदलने का प्रस्ताव है। इससे बिलिंग कलेक्शन और मीटर रीडिंग जैसे खर्च बचेंगे। विद्युत सेक्टर में निवेश आकर्षित करने के लिए कराधान कानून संशोधन अधिनियम 2019 में दी गई 15% रियायत बिजली बनाने वाली कंपनियों को दी जाएगी। शर्त यह है कि उत्पादन 31 मार्च 2023 तक शुरू कर दें।

एसएमई का समाजशास्त्र

एमएसएमई को देरी से होने वाले पेमेंट रोकने के लिए एप बेस्ड इनवॉयस

एमएसएमई क्षेत्र के छोटे खुदरा विक्रेता, व्यापारी, दुकानदारों को ऑडिट से छूट की टर्नओवर सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दी गई है। लेकिन यह उन्हीं उद्यमों पर लागू होगा, जिनके कारोबार में नकद लेनदेन 5% से कम है। एमएसएमई को देरी से होने वाले पेमेंट रोकने के लिए ऐप बेस्ड इनवॉयस की व्यवस्था होगी। पिछले साल 5 लाख से अधिक उद्यमियों को लोन मिला है। यह योजना को एक साल बढ़ा दी गई है।

बोझः एलआईसी का एनपीए 5 साल में दो गुना बढ़कर 25 हजार करोड़ पहुंचा

पिछले 5 साल में एलआईसी के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए दोगुने स्तर तक पहुंच गए हैं। मार्च 2019 तक एनपीए का ये आंकड़ा निवेश के अनुपात में 6.15% के स्तर पर था, जबकि 2014-15 में एनपीए 3.30% था। यानी 5 साल में एनपीए 100% उछला है। यह यह एनपीए निजी क्षेत्र के यश बैंक, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक के बराबर हो गया है। 31 मार्च 2019 को कंपनी के सकल एनपीए 24 हजार 777 करोड़ रु. थे, जबकि कंपनी पर कुल देनदारी यानी कर्ज 4 लाख करोड़ रु. था।

5 करोड़ टर्नओवर वाले उद्योग का ऑडिट नहीं

विनिवेश का अर्थशास्त्र

2.10 लाख करोड़ का लक्ष्य, इस साल पहली छमाही में 12 हजार करोड़ आए

सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में विनिवेश के जरिए 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। 2019-20 में 1.5 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य था। हालांकि सितंबर महीने तक सरकार सिर्फ 12,359 करोड़ रुपए जुटा पाई है। यह कुल लक्ष्य का सिर्फ 10 फीसदी ही है। जबकि इस बार सरकार ने लक्ष्य इस साल के लक्ष्य से दो गुना कर दिया है। इसके अलावा सरकार ने एजुकेशन सेक्टर में एफडीआई लाने की बात कही है।

सरकार ने उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र के लिए कई घोषणा की है। सिंगल विंडो वाले ई-लॉजिस्टिक्स बाजार का गठन करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स नीति लाएगी। सरकार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए लॉजिस्टिक्स का खर्च कम करने की कोशिशें कर रही है। इसके अलावा सरकार ने उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र के लिए 27 हजार करोड़ दिए हैं।यह राशि बीते बजट से सिर्फ 0.9% अधिक है।
वित्त मंत्री ने कहा देश को मोबाइल हब और हर जिले को एक्सोपोर्ट हब बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में ज्यादा काम करेगी। अगले पांच साल में 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य है। निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘निवेश क्लियरेंस सेल\' बनेगा। सेल में 5 नए बनने वाले इकोनॉमिक कॉरिडोर, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स की जानकारी रहेगी। सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रक्रिया से आसानी होगी। निर्यातकों के लिए निर्विक (निर्यात ऋण विकास) योजना आएगी। इससे निर्यातकों को अधिक बीमा कवर कम प्रीमियम पर मिलेगा।

परीक्षा देने बैठी सरकार ने सबसे ज्यादा फोकस इस सवाल पर किया कि पैसा कहां से जुटाया जाए?

}आईडीबीआई की 46 फीसदी हिस्सेदारी भी बेचेगी सरकार

}पर शर्तें लागू, नकद लेनदेन 5% कम हो तभी ऑडिट से छूट होगी

}एलआईसी की कितनी हिस्सेदारी से आईपीओ आएगा, नहीं बताया

फोकस... पैसा कहां से लाएं

उद्योग के लिए क्या किया गया?
उद्योग-वाणिज्य को 27,300 करोड़ रुपए दिए, ये पिछले साल से सिर्फ 0.9% ज्यादा*
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मैन्यूफैक्चरिंग में सुधार के लिए क्या? देश को मोबाइल हब और जिलों को एक्सपोर्ट हब बनाने के लिए नई स्कीमें और पॉलिसी**



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BAREHATA News - mp news lic will now become the life of the government nectar
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source https://www.bhaskar.com/mp/sagar/news/mp-news-lic-will-now-become-the-life-of-the-government-nectar-063550-6525825.html

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