न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने बहुत कम समय में अपने फैसलों और कार्यशैली से दुनियाभर में लोगों का ध्यान खींचा है। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा पिछले साल 15 मार्च को हुई थी। उस दिन एक ऑस्ट्रेलियाई गनमैन ने क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों में 51 लोगों की हत्या कर दी थी। संकट की घड़ी में आर्डर्न ने न्यूजीलैंड के मुसलमानों के साथ जिस तरह सहानुभूति और स्नेह का व्यवहार किया, उसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई पड़ी थी। उन्होंने ऐसे समय एकता का संदेश दिया जब कई देशों ने धर्म का आधार पर विभाजन रेखा खींच रखी है। आर्डर्न की अगुआई में कई देशों ने इंटरनेट पर आतंकवाद, हिंसा, उग्रवाद और नफरत फैलाने वाले कंटेंट के प्रसार के खिलाफ पहल की है। अब उनके सामने अपने नेतृत्व की नई शैली को साबित करने की चुनौती है। सितंबर के आम चुनावों में आर्डर्न को अपने देश के वोटरों का विश्वास जीतना है।
कई देशों में वोटर मजबूत नेताओं और बढ़-चढ़कर दावे करने वाले लोगों की ओर आकर्षित होते हैं। आर्डर्न ने टाइम को आॅकलैंड में अपने दफ्तर में दिए एक इंटरव्यू में बताया ‘जब वोटर अधिकारविहीन और बेबस महसूस करते हैं। उस समय हम उनके भीतर भय की भावना जगा सकते हैं। दूसरों पर दोष मढ़ सकते हैं। एक अन्य रास्ता भी है, हम स्वयं कुछ जिम्मेदारी लेकर अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनेताओं के प्रति उनमें उम्मीद जगा सकते हैं। हमें वोटरों की भावनाओं को ध्यान में रखकर कदम उठाना चाहिए’।
जनसंहार के बाद आर्डर्न ने कई मोर्चों पर कदम उठाए। कुछ दिन के अंदर गन कंट्रोल का कानून पेश किया। उन्होंने गनमैन का नाम कभी नहीं लिया। श्वेतों की सर्वोच्चता में विश्वास करने वाले हमलावर ने अपना कारनामा फेसबुक पर लाइव दिखाया था। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी कंपनियों पर सवाल उठाने वाले नेताओं जैसे जर्मनी की एंजेला मर्केल और फ्रांस के इमैनुअल मेक्रों से संपर्क किया। फेसबुक के मार्क जकरबर्ग, यूट्यूब की सूसन वोजसिस्की, टि्वटर के जैक डोर्सी से सीधे बात की। इसके कुछ माह बाद पेरिस में क्राइस्टचर्च कॉल सम्मेलन में आर्डर्न, मेक्रों और उनकी टीम ने टेक्नोलॉजी कंपनियों से ऑनलाइन आतंकवादी और हिंसक कंटेंट का प्रसार रोकने की अपील की थी।
अच्छे प्रशासक और अच्छे इंसान की पहचान बनाई
Â39 साल की आर्डर्न 2017 में प्रधानमंत्री बनी थीं। पिछले साल उनके सामने दो बड़ी चुनौतियां आई हैं। 1-क्राइस्टचर्च जनसंहार में 51 लोगों की हत्या। 2- देश के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर चीन में कोरोना का प्रकोप।
Âउन्होंने जब पद संभाला तब गर्भवती थीं। पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो के बाद वे दूसरी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए संतान को जन्म दिया।
Âआर्डर्न की सरकार ने प्रति घंटा न्यूनतम वेतन बढ़ाया है।
Âसवैतनिक पेरेंटल लीव को 18 सप्ताह से बढ़ाकर 22 सप्ताह किया।
Âसमुद्र में तेल, गैस की खोज बंद कर दी है। 15 करोड़ पेड़ लगाए हैं।
Âसितंबर के आम चुनाव में आर्डर्न की नई नेतृत्व शैली की परीक्षा होगी।
जनसंहार के बाद आर्डर्न ने कई मोर्चों पर कदम उठाए। कुछ दिन के अंदर गन कंट्रोल का कानून पेश किया। उन्होंने गनमैन का नाम कभी नहीं लिया। श्वेतों की सर्वोच्चता में विश्वास करने वाले हमलावर ने अपना कारनामा फेसबुक पर लाइव दिखाया था। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी कंपनियों पर सवाल उठाने वाले नेताओं जैसे जर्मनी की एंजेला मर्केल और फ्रांस के इमैनुअल मेक्रों से संपर्क किया। फेसबुक के मार्क जकरबर्ग, यूट्यूब की सूसन वोजसिस्की, टि्वटर के जैक डोर्सी से सीधे बात की। इसके कुछ माह बाद पेरिस में क्राइस्टचर्च कॉल सम्मेलन में आर्डर्न, मेक्रों और उनकी टीम ने टेक्नोलॉजी कंपनियों से ऑनलाइन आतंकवादी और हिंसक कंटेंट का प्रसार रोकने की अपील की थी।
आर्डर्न कहती हैं, इस पहल का असर अक्टूबर 2019 में हल्ले, जर्मनी में यहूदियों के धर्मस्थल पर हुई शूटिंग के समय देखा गया था। टि्वश पर हमला लाइव दिखाया जा रहा था। फुटेज को 2200 लोग ही देख पाए थे। कंपनी ने जल्द इसे हटा दिया था। इस वर्ष 8 फरवरी को थाईलैंड में एक गनमैन के हमले की लाइव स्ट्रीमिंग चार घंटे के भीतर बंद कर दी गई थी। आइएसआइएस के ऑनलाइन प्रभाव के खिलाफ कुछ सोशल मीडिया नेटवर्क के एक समूह का विस्तार करने में आर्डर्न सहायता कर रही हैं। न्यूजीलैंड पहला देश नहीं है जो व्यापक गोलीबारी का शिकार हुआ है। लेकिन, आर्डर्न पहली नेता हैं जिन्होंने ऑनलाइन हिंसक प्रचार के खिलाफ जनता, सरकारों और इंडस्ट्री को एकजुट करने के लिए कदम उठाए हैं। केंटरबरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रोनविन हेवर्ड कहते हैं, हम दुनियाभर को केवल नैतिक नेतृत्व दे सकते हैं।
(टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)
Âअब उन्हें अामचुनाव में अपने देश के वोटरों का भरोसा जीतना है
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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-new-zealand39s-big-initiative-many-countries-came-together-to-stop-violence-on-the-internet-071009-6745809.html
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