जिले के ग्रामीण इलाकों में जाकर टीबी व मलेरिया पीड़ित मरीज चिह्नित कर उन्हें उपचार देने के लिए द ग्लोबल फंड संस्था द्वारा अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित चलित अस्पताल दिया था। यह चलित अस्पताल पिछले सवा दो माह से एमडीआर टीबी अस्पताल के बाहर खड़ा धूल खा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस चलित अस्पताल के लिए स्टाफ तक मुहैया नहीं करा पाए हैं। जबकि स्टाफ मुहैया कराने के संबंध में क्षेत्रीय संचालक एक माह पहले ही आदेश दे चुके हैं। सीएमएचओ का कहना है कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई वे नदारद हैं।
चलित अस्पताल के संबंध में तीन दिन पहले भी संजीवनी क्लीनिक के उदघाटन के अवसर पर क्षेत्रीय संचालक डॉ. एके दीक्षित से पूछा गया तो उनका कहना था कि चलित अस्पताल के लिए मैं एक माह पहले ही कर्मचारी देने के लिए आदेश दे चुका हूं। उन्होंने सीएमएचओ डॉ. एसके वर्मा से कहा कि पिछले महीने जब मेरे पास सीएमएचओ का चार्ज था तभी मैंने चलित अस्पताल चलाने के लिए स्टाफ के आदेश कर दिए थे। तब स्टाफ क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा चलित अस्पताल सिर्फ टीबी अस्पताल के लिए नहीं आया। संभाग में इसे जाना है। हर जिले में एक-एक माह इसे रखना था।
ज्ञात रहे द ग्लोबल फंड संस्था द्वारा टीबी एवं मलेरिया जैसी बीमारी की रोकथाम के लिए अत्याधुनिक चलित अस्पताल (वैन) उपलब्ध कराई गई है। इस चलित अस्पताल में एक्सरे, बलगम की जांच के साथ ही अन्य सुविधाएं भी हैं। इस चलित अस्पताल को 15 दिसंबर को ग्वालियर जिले में इस उद्देश्य से भेजा गया है कि यहां के ग्रामीण क्षेत्रों के क्षय रोगियों को जांचों व दवाओं के लिए परेशान न होना पड़े और उन्हें गांव में ही जांच व दवा उपलब्ध हो जाएं।
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. एसके वर्मा का कहना है कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी वे नहीं गए हैं। उन्हें नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही यह चलित अस्पताल चालू करा दिया जाएगा।
एमडीआर टीबी अस्पताल के बाहर खड़ा अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित वाहन।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-employees-whose-duty-was-imposed-for-mobile-hospital-missing-facility-072623-6713195.html
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