Thursday, January 30, 2020

वार्डों के बाद अब महापौर के आरक्षण पर निगाह, सभापति के लिए भी दावेदारी


नगरीय निकाय चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पार्षद की दावेदारी करने वाले नेताओं की निगाह महापौर के आरक्षण पर है। हालांकि बिना आरक्षण प्रक्रिया के सभापति का चुनाव लड़ने के लिए भी पार्षद बनने के इच्छुक उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के लिए महापौर के आरक्षण की प्रक्रिया एकसाथ होगी। कलेक्टर अनुराग चौधरी का कहना है कि महापौर के आरक्षण की प्रक्रिया भोपाल में ही होगी। अभी इसकी कोई तारीख तय नहीं हुई है।

महापौर के आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर दावेदारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। चुनावी गणित में माहिर नेताओं का कहना है कि इस बार महापौर की सीट महिला के लिए आरक्षित हो सकती है। हालांकि वे इस नतीजे तक नहीं पहुंच पा रहे कि किस वर्ग की महिला के लिए सीट सुरक्षित होगी। वे पिछले दो दशक की परिषदों का निष्कर्ष निकालकर दावा कर रहे हैं कि वर्ष 1999 में अनुसूचित जाति, 2004 में सामान्य, 2009 में पिछड़ा वर्ग महिला और उसके बाद 2014 में एक बार फिर से सीट सामान्य हो गई। इससे ऐसा लगता है कि इस बार सीट महिला के लिए आरक्षित हो सकती है। पार्षदों में से महापौर के चुनाव की प्रक्रिया की घोषणा के साथ ही दोनों ही पार्टियों के कुछ वरिष्ठ नेता भी पार्षद के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

26 साल बाद पार्षद करेंगे महापौर का चुनाव: 26 साल बाद एक बार फिर पार्षदों को अपने में से ही महापौर चुनने का मौका मिलेगा। इससे पहले 1994 में परिषद ने अरुणा सेन्या को महापौर चुना था।

आरक्षण प्रक्रिया रोस्टर प्रणाली से होगी


विनोद शर्मा, पूर्व आयुक्त नगर निगम



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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-after-wards-now-the-mayor39s-reservation-is-on-view-the-claim-for-the-chairman-also-072604-6509489.html

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