Monday, February 10, 2020

बीमारियाें का जड़ है तनाव, जो चार कारण से होता है, तन, मन, धन और संबंध... टिप्स, खुद के लिए समय निकालें, ध्यान करें


संसार में हर व्यक्ति की भागदाैड़ का लक्ष्य जीवन में सुख प्राप्ति है। सुख प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए उसके साधनाें के लिए हर काेई बेतहाशा भाग रहा है। वास्तव में क्या करना चाहिए ये उन्हें समझ नहीं अा रहा है। अपने विचाराें अाैर संकल्प अाैर उम्मीदाें से ही तनाव हाेता है। यही तनाव बीमारियाें की जड़ है। जैसे ही तनाव हाेता है वैसे ही ब्लड प्रेशर बढ़ने या घटने लगता है। यदि शुगर है ताे ब्लड प्रेशर बढ़ते ही शुगर भी बढ़ने लग जाएगी। वास्तव में सुख शांतिमय जीवन बनाने के लिए हमारे जीवन में चार बातें मुख्य हैं। इनमें धन-धन की अावश्यकता, तन-स्वस्थ्य तन चाहिए, संबंध-संबंधाें में सुख चाहिए अाैर मन की शांति।

धार के ईश्वरीय ब्रह्माकुमारी अाश्रम शुक्ला काॅलाेनी में तीन दिनी तनाव मुक्त शिविर में राजयाेग के साथ ध्यान अाैर तनाव काे कम करने तरीके बताने माउंटअाबू राजस्थान से अाए राजूभाई ने उक्त चार बाताें की व्याख्या करते हुए कहा कि अाज लाेगाें की साेच हाे गई है कि यदि उनके पास पैसा हाेगा ताे ही सब उनकाे पूछेंगे ताे ही सुख मिलेगा। पैसे के लिए संबंधाें में टकराव अा रहा है, विवाद हाे रहे हैं। यही तनाव का पहला कारण है, लेकिन तन पर जब संकट अाता है ताे हम चाहे जितना पैसा खर्च करने के लिए तैयार हाे जाते हैं। जब तन खराब हाेता है ताे भी तनाव बढ़ता है। इसी प्रकार संबंधाें में खराबी अाने से भी सुख छीन जाता है। इसलिए संबंधाें में सुख चाहिए। अंतिम बात मन की शांति महत्वपूर्ण है। लाेग यदि किसी शांत जगह पर बैठ जाएं जहां काेई अावाज या शाेर न हाेता हाे ताे क्या उसे शांति कहेंगे। क्याेंकि मनुष्य के दिमाग में ताे विचार चल रहे हैं, चाहे वह शांत जगह पर बैठा है, मन में उठ रहे तूफान काे शांत करना ही तनाव का उपाय है। इसलिए मन की शांति बहुत जरूरी है।

ध्यान बहुत जरूरी है, समय बहुत है, लाेग देते नहीं है

राजूभाई ने बताया कि लाेग कहते हैं कि सुबह से लेकर रात तक हमें समय नहीं मिलता है। काम का इतना अधिक तनाव रहता है। ध्यान या अन्य बाताें के लिए समय कहां से लाएं। लेकिन जब काेई विशेष बात हाेती है ताे लाेग उसमें समय निकालकर भी जाते ही हैं। शादी हाे, अंतिम संस्कार हाे या काेई बड़ा कार्यक्रम हाे ताे समय ताे निकालते ही हैं। एेसे ही ध्यान के लिए भी समय निकाला चाहिए। हम रात 3.30 बजे से जागकर मेडिटेशन करते हैं। यह समय भगवान का दिया सबसे महत्वपूर्ण समय है। यदि इस समय पर ध्यान करेंगे ताे सुबह तक हमें कितना समय मिल जाएगा। हम देर रात तक टीवी देखने में, नशाखाेरी में, बात करने में समय बर्बाद करते हैं ताे सुबह 8-9 बजे तक जाग नहीं सकते। हमें कुछ करने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा। जब मनुष्य ठान लेगा ताे उसके लिए सबकुछ संभव है। ध्यान करने से तनाव से मुक्ति प्राप्त हाे सकती है। दूसराें से उम्मीद रखना छाेड़ें, बदले की भावना न रखें, क्याेंकि यह शरीर मेरा है लेकिन मैं नहीं हूं। मैं अात्मा है। यही सबकुछ है। ध्यान इसी अात्मा से साक्षात्कार की विधि है, इसी से व्यक्ति तनाव से मुक्त हाे सकता है।

कर्म अाॅफ फिलासाॅफी : जैसा कर्म करते हैं वैसा ही फल मिलता है

तनाव मुक्त हाेने के लिए कर्म अाॅफ फिलासाॅफी समझना बहुत जरूरी है। हम वर्तमान समय काे देखते हैं। लेकिन कर्म अाॅफ फिलाॅसाफी के लिंक में पुनर्जन्म की बात भी अाती है। अर्थात जाे हम बाेते हैं वहीं हमें मिलता है। गेहूं का बीज बाेते हैं तो गेहूं मिलता है अाैर अाम लगाएंगे ताे अाम मिलेगा, लेकिन समय का अंतर हाे जाता है। ये कर्माें की खेती है। जैसा हम कर्म करते हैं ताे वैसा ही हमें फल मिलता है। हम हर बात के लिए भगवान काे दाेष देते हैं पर मन की शांति के लिए कुछ नहीं करते हैं।

राजू भाई



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