प्ली-बारगेनिंग दांडिक मामले का समझौते के आधार पर अंतिम निराकरण हेतु एक अनुबंध हैं।
पुलिस द्वारा प्रस्तुत अभियोग पत्र से उत्पन्न मामले में यह अनुबंध अभियुक्त, मामले के अनुसंधानकर्ता, अभियोजक एवं पीड़ित के मध्य होता हैं, जबकि किसी परिवादी की शिकायत पर न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए गए मामले में यह अनुबंध अभियुक्त एवं पीड़ित के मध्य होता हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व अपर न्यायाधीश दिनेश कुमार खटीक ने यह बात कही।
वह बुधवार को जिला जेल दतिया में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में बोल रहे थे। उन्होंने कैदियों की समस्याओं के साथ जेल में कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहित सिंह भी मौजूद रहे। शिविर को संबोधित करते हुए श्री खटीक ने कहा कि यह अनुबंध न्यायालय के निर्देशन एवं नियंत्रण में होता हैं। कोई अभियुक्त, जिसके खिलाफ न्यायालय में मामला चल रहा हैं और वह 18 वर्ष से अधिक आयु का हैं, तो वह स्वैच्छिक रूप से प्ली बारगेनिंग के प्रावधान का प्रयोग करने हेतु शपथ-पत्र से समर्पित एक आवेदन, जिसमें मामले का संक्षिप्त विवरण तथा अपराध का उल्लेख हो, न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता हैं। यह आवेदन उसी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा, जिस न्यायालय में उस अभियुक्त के विरूद्ध मामला चल रहा हैं परन्तु अभियुक्त ऐसे मामलों में प्ली बारगेनिंग के लिए आवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकता, जहां मामले का अपराध 7 वर्ष से अधिक के कारावास से दण्डनीय हो, महिला या 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे के विरूद्ध कारित किया गया हो या देश की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता हैं।’प्ली बारगेनिंग’ का एक बार पूर्व में लाभ उठा चुके अथवा किसी न्यायालय द्वारा पूर्व में उसी अपराध में दोष सिद्ध ठहराए गए अभियुक्त द्वारा भी प्ली बारगेनिंग के लिए आवेदन प्रस्तुत नहीं किया जा सकता हैं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/mp/datia/news/mp-news-additional-judge-addressing-the-legal-literacy-camp-in-the-district-jail-071019-6609713.html
No comments:
Post a Comment