Tuesday, February 11, 2020

संत की संगति बिना विवेक नहीं होता: उमाशंकर शास्त्री


कुसमी ग्राम में शिवलिंग निर्माण एवं श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से दोपहर तक ग्रामीणों द्वारा भक्तिभाव के साथ शिवलिंग निर्माण किए जाते है। जिनका रूद्राभिषेक के बाद तालाब में विसर्जन किया जाता है। वहीं दोपहर 3 बजे पंडित उमाशंकर शास्त्री द्वारा श्रीमद भागवत कथा का वाचन किया जाता है।

कथा के चौथे दिन उमाशंकर शास्त्री ने कहा कि संत की संगति बिना विवेक नहीं होता। प्रभु कृपा के बिना संत की संगति सहज नहीं है। संत की संगति आनन्द और कल्याण का मूल है। इसका मिलना ही फल है। अन्य सभी उपाय केवल फूल मात्र हैं। उन्होंने कहा एक पल की कुसंगति जीवन को नरक में डाल देती है। कथा का प्रसंग सुनाते हुए लोक उपदेश ने कहा कि मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए। क्योंकि एक पल का कुसंग जीवन को नर्क में डाल देता है। कौरवों ने पांडवों के साथ कुसंग किया अंत में सभी को मरना पड़ा। इसलिए मनुष्य को कुसंगति से बचकर ज्ञानवान साधु संतों के सत्संग में अधिक से अधिक समय रहना चाहिए। जैसे सद्गुणों के साथ-साथ संत समागम से हरि की भक्ति प्राप्त होती है। आचार्य गोविंद तिवारी, उमेश दुबे, राम दुबे, शंकर लाल यादव, शिवराम यादव, बृजेंद्र छोटू, निर्देश सरमन आदि कथा में सम्मिलित रहे।



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Banwar News - mp news conscience of saints is not without wisdom umashankar shastri


source https://www.bhaskar.com/mp/damoh/news/mp-news-conscience-of-saints-is-not-without-wisdom-umashankar-shastri-062525-6601126.html

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