Wednesday, February 5, 2020

आदिम जाति कल्याण विभाग के शिक्षक दफ्तरों में अटैच, छात्रावासों की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों पर


आदिम जाति कल्याण विभाग के शिक्षक, जिन्हें छात्रावासों का संचालन करना था। उन्हें कार्यालयों में अटैच कर दिया गया। जिससे छात्रावासों की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग में कार्यरत स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों पर आ गई। हालत यह है कि कई जगह एक ही शिक्षक होने के बावजूद उसे छात्रावासों का प्रभार दे दिया गया। जिससे न तो छात्रावासों का संचालन व्यवस्थित हो पा रहा है और न ही स्कूलों का। जिसका खामियाजा छात्र छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। हैरानी यह है कि शासन ने कार्यालयों में अटैचमेंट व अतिरिक्त प्रभार खत्म करने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने 18 दिसंबर को विकास खंड अधिकारी व संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया था, लेकिन अब तक इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता के चलते स्कूल व छात्रावासों का ढर्रा बदल नहीं रहा है। बच्चों के शैक्षणिक स्तर में सुधार आए, इसके लिए कार्यालयों में अटैच व अतिरिक्त प्रभार का दायित्व का निर्वाहन कर रहे शिक्षकों के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश कई बार जारी हो चुके है।

स्कूलों में पदस्थ शिक्षक, अधिकारियों से सांठगांठ कर शिक्षा विभाग के अलावा अन्य विभागों में अतिरिक्त प्रभार लिए हुए हैं। जिसको लेकर जिला शिक्षा अधिकारी दतिया द्वारा 18 दिसंबर को विकासखंड अधिकारी व प्रभारी प्राचार्यों को निर्देशित किया गया था कि प्रमाणीकरण के माध्यम से अतिरिक्त प्रभार लिए शिक्षकों की जानकारी कार्यालयों में भेजें। चौकाने वाली बात यह है कि आदेश को 28 दिन बीतने के बाद भी अभी तक जानकारी नहीं दी गई।

छात्रावासों का संचालन भी नहीं हो पा रहा व्यवस्थित

स्कूलों के शिक्षकों को अटैच करने से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। तैतना में एक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें छात्रावास की जिम्मेदारी सौंप दी गई। ऐसे में न तो स्कूल में पढ़ाई हो पाती है और न ही छात्रावासों का संचालन व्यवस्थित हो पा रहा है। इसके अलावा भांडेर ब्लॉक में कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों की संख्या छात्र-छात्राओं के अनुपात में बेहद कम है। बावजूद उन्हें शिक्षा विभाग या अन्य विभागों में अटैच किया गया है। जिससे स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हैरानी यह है कि अधिकारी भी सिर्फ आदेश जारी कर मामले को दबा देते हैं। बहरहाल इस तरह की व्यवस्था से स्कूलों में पढ़ाई चौपट हो रही है और छात्रावास का पूरा लाभ बच्चों काे नहीं मिल पा रहा है। बच्चे परेशान हो रहे हैं।

किसी भी शिक्षक पर नहीं अतिरिक्त प्रभार


संजय श्रीवास्तव, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा विभाग दतिया

दफ्तरों में अटैच, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

छात्रावासों के संचालन की जिम्मेदारी आदिम जाति कल्याण विभाग के शिक्षकों की रहती है। पिछले साल अगस्त में श्योपुर व बड़वानी से शिक्षक नरेन्द्र श्रीवास्तव, पवन जसवन्त, सतेन्द्र यादव, गोविन्द्र त्रिपाठी को आदिम जाति कल्याण विभाग दतिया में पदस्थ किया गया था। उसके बाद से यह शिक्षक कार्यालय में भी अटैच कर दिए गए। जबकि भांडेर ब्लॉक के अंतर्गत गोंदन जूनियर बालक छात्रावास में पदस्थ अरविंद्र सिंह यादव को प्रभारी अधीक्षक बनाया गया। अरविंद्र सिंह यादव की पदस्थापना प्राथमिक स्कूल तैतना है। यह एक शिक्षकीय शाला है। बावजूद इन्हें दोनों जगह का प्रभार दे दिया गया। इसी प्रकार जूनियर बालक छात्रावास भांडेर में माध्यमिक स्कूल मुरिया के पदस्थ शिक्षक कालीचरण दिनकर को प्रभारी अधीक्षक का चार्ज दिया गया है। जबकि स्कूल में इसके साथ एक अन्य शिक्षक ही है। पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में माध्यमिक विद्यालय बागपुरा में पदस्थ राघवेंद्र यादव को प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है, पिपरौआ जूनियर बालक छात्रावास में प्राथमिक स्कूल निचरौली में पदस्थ मानसिंह राजपूत को अधीक्षक बाया गया है। जूनियर बालक छात्रावास सालोन बी में सरमनपुरा प्राथमिक स्कूल में पदस्थ महावीर धाकड़ को प्रभारी बनाया है, जबकि स्कूल में सिर्फ दो शिक्षक है। सीनियर कन्या छात्रावास भांडेर एवं खंड स्तरीय कन्या छात्रावास दोनों का चार्ज विजय लक्ष्मीराजन को दिया है। जबकि यह हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ हैं।

माध्यमिक स्कूल रमपुरा जहां सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ है, जबकि बच्चों की संख्या ज्यादा।



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source https://www.bhaskar.com/mp/datia/news/mp-news-attached-in-teacher-offices-of-primitive-caste-welfare-department-responsibility-of-hostels-on-school-teachers-071138-6555563.html

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