Monday, February 3, 2020

आर्थिक गणना को भी एनपीआर, सीएए व एनआरसी समझ रहे लोग


केंद्र सरकार हर पांच साल में देश की आर्थिक स्थिति का आंकलन करने के लिए आर्थिक गणना कराई जाती है। परंतु सीएए यानी सिटीजन अमेडमेंट िबल, एनपीआर नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और एनआरसी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन के चक्कर में लोग आर्थिक गणना के लिए आने वाले लोगों को भी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। जबकि इस गणना में न तो किसी से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और न ही किसी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी। साथ ही इसका डाटा भी सार्वजनिक नहीं किया जाता।

एप के माध्यम से गणना करने आया व्यक्ति नाम, पता, मोबाइल नंबर, परिवार में रहने वाले सदस्यों की संख्या, अगर उद्योग, व्यवसाय संचालित हो रहा है तो उसकी जानकारी लेकर ऑऩलाइन फीड करता है। परंतु यह जानकारी देने से अधिकांश लोग बच रहे हैं। कहीं न कहीं उन्हें यह डर सता रहा है कि इससे उनकी निजी जानकारी शेयर हो सकती है। जबकि इस सर्वे में पर्सनल जानकारी कहीं भी न तो शेयर हो रही है और न ही उसका कहीं उपयोग होने वाला है। बल्कि इसके जरिये देश की आर्थिक प्लानिंग का खाका तैयार होता है। इसके बाद सरकारें योजनाएं बनाती है कि भविष्य में किस सेक्टर में क्या क्या आवश्यकताएं हैं। ताकि भविष्य में उस सेक्टर को मंदी से उबारने के लिए कोई प्रयास हो सके। जिस तरह बुरहानपुर में पॉवरलूम उद्याेग संचालित हैं।

आर्थिक सर्वे... सुपरविजन में हो रहा काम

आर्थिक सर्वे का काम सांख्यिकीय विभाग के सुपरविजन में हो रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किए गए थे। आमजन को भी जानकारी लेने पहुंच रहे एन्युमिरेटर इस बात से अवगत करा रहे हैं कि यह सर्वे देश की आर्थिक प्लानिंग तैयार करने के लिए किया जाता है और पहले के सालों में भी होता रहा।

चाय बेचने वाले से लेकर छोटे बड़े उद्योगों का संचालन कर रहे लोगों, आमजन से आर्थिक गणना में जानकारी जुटाई जाती है। अगर किसी घर में रहवासी स्थल के साथ छोटा मोटा कारोबार भी संचालित होता है तो उसकी जानकारी एकत्रित की जाती है। यह सब आर्थिक प्लानिंग के लिए होता है।


अधिकारियों की समझाइश

देश की आर्थिक दिशा तय करती है आर्थिक गणना


-लुसिया रावत, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी बुरहानपुर

न आधार कार्ड नंबर मांगे जा रहे न कोई पर्सनल जानकारी


-भारती क्षेत्रे, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी बुरहानपुर

लोग बेझिझक दें जानकारी, यह आर्थिक गणना है


-अंकित वर्मा, जिला प्रबंधक कॉमन सर्विस सेंटर

फैक्ट फाइल

1.96
लाख लोगों का करना है सर्वे

कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से हो रहा ये आर्थिक सर्वे

पॉवरलूम में जानकारी भरते हुए एन्युमिरेटर।

जानें यह भी खास

200
से अधिक काॅमन सर्विस सेंटर जिले में

98
हजार 998 घर, दुकानों का हुआ सर्वे

160
एन्युमिरेटर कर रहे जिले में सर्वे

देश में छठीं आर्थिक गणना वर्ष 2013 में की गई थी। जबकि पहली आर्थिक गणना 1977 में हुई थी। इसके बाद दूसरी 1980 में, तीसरी 1990, चौथी 1998 और पांचवीं 2005 में की गई थी।

एन्युमिरेटर के माध्यम से करा रहे सर्वे

आर्थिक गणना का काम केंद्र सरकार ने इस बार शहर व गांवों में संचालित होने वाले कॉमन सर्विस सेंटरों को दिया है। जिसमें प्रशिक्षित युवक-युवतियों को बकायदा ऑनलाइन परीक्षा कराकर रखा गया है। इन प्रशिक्षित युवाओं को एन्यूमिरेटर बनाया गया है। एन्युमिरेटर द्वारा घर घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। बुरहानपुर जिले में अब तक करीब 50 फीसदी सर्वे हो चुका है। प्रदेश में बुरहानपुर का 12वां स्थान है।



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source https://www.bhaskar.com/mp/burhanpur/news/mp-news-people-are-considering-npr-caa-and-nrc-for-economic-calculation-too-065539-6541889.html

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