Saturday, February 8, 2020

प्राकृतिक जल स्रोत बावड़ी और कुओं में उग रहे पेड़ से खत्म हो रहा अस्तित्व


संरक्षण के लिए अफसर नहीं कर रहे प्रयास, हर साल जल संकट की बनती है स्थिति

नगर सहित आसपास प्राचीन काल और नवाबी शासन की बावड़ी और कुओं के संरक्षण और सहजने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इन बावड़ियों की नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं होने के कारण अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।

हालत यह है कि इन कुओं और बावड़ी में लोग कचरे डालने का उपयोग कर रहे हैं, जिससे इन कुओं का पानी गंदा हो रहा है। साथ ही जल संकट की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बाड़ी कला स्थित आदिवासी आश्रम बावड़ी मोहल्ला वार्ड नंबर 1 सहित हिंगलाज मंदिर शक्तिपीठ, राम जानकी मंदिर में बावड़ी-कुओं की संख्या अधिक है, लेकिन अधिकतर बावड़ियां और कुएं देखरेख के अभाव में समाप्त होते जा रहे हैं। लगभग 20 वर्ष पहले इन बावड़ी का पानी नगर के रहवासियों के घरों तक जाता था, लेकिन लगातार नगर परिषद के द्वारा साधन संसाधन और घर-घर नल जल योजना के माध्यम से नल कनेक्शन और निजी मोटर लगवा ली गई जिसके चलते लोगो ने कुएं और बावड़ियों पर ध्यान देना बंद कर दिया।

परिणाम यह है कि कई जगह कुओं का पुराव करके उनका अस्तित्व मिटा दिया गया है तो कई कुआं में बड़े-बड़े पेड़ उग रहे हैं। दूसरी ओर नगर में एकमात्र बावड़ी हिंगलाज शक्तिपीठ पर है जो कि पूर्ण रूप से संचालित हो रही है और उसका उपयोग लगातार किया जा रहा है बाकी आधा दर्जन से अधिक कुएं और बावड़ी गंदगी की चपेट में होने के कारण समाप्ति की ओर है।

उपेक्षा की शिकार हो रही बावड़ियां।



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Bari News - mp news natural water source is dying out from the trees growing in stepwells and wells


source https://www.bhaskar.com/mp/raisen/news/mp-news-natural-water-source-is-dying-out-from-the-trees-growing-in-stepwells-and-wells-063619-6579293.html

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