सरकारी खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों का पंजीयन शुरू हो गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसान को इस बार वह तीन तारीखें भी बतानी होगी, जिनमें अनाज लेकर वे खरीदी केंद्र पर आएगा। इसके साथ ही संभावित मात्रा की जानकारी भी देना होगी। प्रदेश में पंजीयन प्रक्रिया एक फरवरी से शुरू हो गई है, जो 28 फरवरी तक होगी। पहले से ई-उपार्जन पोर्टल पर दर्ज किसानों को भी नए सिरे से पंजीयन कराना होगा।
उधर, गेहूं बेचने वाले किसानों के पंजीयन प्रक्रिया में किसान वे ही खाता नंबर अंकित कराएं जो राष्ट्रीयकृत या जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में हैं। यदि किसान ने भूलवश जनधन और छह महीने से बंद लेन-देन वाले खातों का पंजीकृत किया गया है तो उन्हें अपनी उपज का भुगतान नहीं मिलेगा। यह निर्देश खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने दिए हैं। विभागीय आदेश में यह भी कहा गया कि किसानों को भुगतान जेआईटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में किया जाएगा। इसलिए किसान पंजीयन में केवल राष्ट्रीयकृत एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखाओं के एकल बैंक खाते ही दर्ज किए जाएं। इसके अलावा स्पष्ट रूप से कहा गया कि जनधन, ऋण, नाबालिग, बंद व अस्थायी रूप से रोके गए खाते दर्ज नहीं कराए जाएं।
गेहूं बेचने के लिए इस बार तीन तारीखें भी बतानी होगी
ई-गिरदावरी से होगा मिलान
किसान पंजीयन को ई-गिरदावरी के सत्यापित भू-अभिलेख के डाटाबेस पर आधारित किया जाएगा। किसान के रकबे की पुष्टि राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी एप में दर्ज रिकार्ड से होगी। इसे लेकर किसान यदि आपत्ति उठाता है तो उसका निराकरण राजस्व विभाग से संपर्क कर करना होगा। संतुष्ट होने के बाद ही पंजीयन प्रक्रिया पूरी होगी।
ई-उपार्जन पोर्टल पर पहले से पंजीकृत किसानों को पोर्टल पर जाकर अपने रिकार्ड में उपज बेचने की तीन संभावित तारीख और विक्रय की मात्रा की जानकारी दर्ज करनी होगी।
14 हजार करोड़ का गेहूं-चना गोदाम में
प्रदेश में पिछले दो साल से करीब 14 हजार करोड़ रुपए का गेहूं, चना समेत अन्य अनाज गोदामों में रखा हुआ है। केंद्र न तो अनाज उठा रहा है और ना ही इसका भुगतान निगम को कर रहा है। इसके चलते निगम को हर साल गेहूं के भंडारण के लिए अनावश्यक रूप से करोड़ों रुपए देना पड़ते हैं। केंद्र सरकार को निगम ने कई बार पत्र भी लिखे है लेकिन केंद्र गेहूं नहीं उठा रहा है। प्रदेश के गोदामों में इस समय 79 लाख टन गेहूं रखा है। इसमें से सिर्फ 27 लाख टन अनाज प्रदेश में पीडीएस में बांटने के लिए हैं।
बढ़ा रकबा, उत्पादन भी बंपर होने की उम्मीद
प्रदेश में गेहूं का रकबा इस बार लगभग 20 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है। यानी प्रदेश में 80 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल 60 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया था। ऐसे में उत्पादन भी बंपर होने की संभावना है। इसे देखते हुए 100 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदी की तैयारी की जा रही है। हालांकि गोदाम पहले से ही भरेे होने की वजह से सरकार ने लगभग 30 लाख मीट्रिक टन क्षमता के ओपन केप बनाकर भंडारण की व्यवस्था बनाने की रणनीति बनाई है।
समर्थन मूल्य 85 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा
रबी विपणन वर्ष 2020-21 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में 85 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ोतरी की गई है। इस बार गेहूं 1925 रुपए क्विंटल खरीदा जाएगा। जबकि पिछले साल किसानों को 1840 रुपए समर्थन मूल्य दिया गया था।
ई-उपार्जन पोर्टल पर ऐसे करें ऑनलाइन पंजीयन
{ आवेदक एमपी ई-उपार्जन की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं।
{ इस होम पेज पर रबी 2020-21 का विकल्प दिखाई देगा, आपको इस विकल्प पर क्लिक करना होगा। विकल्प पर क्लिक करने के बाद सामने कम्प्यूटर स्क्रीन पर अगला पेज खुलेगा।
{ इस पेज पर रबी उपार्जन 2020-21 के लिए किसान पंजीयन आवेदन खुलेगा।
यहां मोबाइल नंबर, किसान कोड या समग्र आईडी डालना होगी, इसके बाद आपको सर्च के बटन पर क्लिक करना होगा।
{ अगले पेज पर पंजीकरण फार्म खुलेगा, इस पंजीयन फार्म में आपको पूछी गई सभी जानकारी जैसे अपना बैंक खाता विवरण, जमीन के स्वामित्व का विवरण और खरीद केंद्र का विवरण आदि दर्ज करना होगा।
{ सही जानकारी भरने के बाद आपको सबमिट के बटन पर क्लिक करना होगा। सफल पंजीकरण के बाद तुरंत आवेदन संख्या और पावती मिल जाएगी।
{ केवल इस पावती संख्या से ही आप अपने उत्पाद को खरीदी केंद्र पर ले जा सकेंगे। एक बेंच मिलेगा। इस तरह पंजीयन प्रक्रिया पूरी होगी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-jan-dhan-and-bank-accounts-closed-for-six-months-will-not-get-payment-for-support-price-wheat-purchase-071044-6594322.html
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