मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि किसी महिला कर्मचारी के खिलाफ अनर्गल भाषा बोलना कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं आता। इसे कानूनन अपराध नहीं मान सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का उद्देश्य महिलाओं में बराबरी लाना और कार्यस्थल को खुशनुमा जगह बनाना है। गलत आरोपों के आधार पर इस कानून के दुरुपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी को बड़ी राहत मिली है। शेष | पेज 9 पर
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source https://www.bhaskar.com/mp/sagar/news/mp-news-speaking-in-unrestrained-language-to-a-female-employee-is-not-sexual-harassment-high-court-064020-6698587.html
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