भोपाल .वचन-पत्र में अतिथि विद्वानों को नियमित करने का वादा कर चुकी राज्य सरकार इनकी समस्या का स्थाई हल नहीं ढूंढ पा रही है। शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में आंदोलनरत करीब 5000 अतिथि विद्वानों को एडजस्ट करने के लिए कॉलेजों में एक हजार नए पद स्वीकृत करने काे मंजूरी दे दी गई, लेकिन इसके खर्च को लेकर वित्त विभाग की आपत्ति और िनयमितीकरण को लेकर मंत्रियों जीतू पटवारी, गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. गोविंद सिंह और बाला बच्चन की अलग-अलग राय होने के चलते इसका सही रास्ता नहीं निकल सका।
इस समस्या से निपटने के लिए पांच मंत्रियों की पूर्व में बनी समिति ने भी बैठक में सुझाव रखे, लेकिन सबके सुझाव अलग-अलग ही थे, इसलिए अंत में स्थाई हल ढूंढने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी, मुख्य सचिव एसआर मोहंती और अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन की एक कमेटी बना दी।
वचन-पत्र में नियमित करने का वादा, अब अलग-अलग सुर
पटवारी बोले- तीन साल का दें मौका, फिर मापदंडों पर नियुक्ति
अतिथि विद्वानों को तीन साल का मौका दें। इस दौरान योग्यता के अनुसार जो लोग पीएचडी और यूजीसी के मापदंड पूरे कर रहे हैं उन्हें नियुक्ति का मौका मिलेगा।
राजपूत बोले- जो वेतन अभी मिल रहा, वही आगे भी देते रहें
वचन पत्र में वादा किया है, इसलिए किसी को न निकालें। वेतन कम कर किसी को नियुक्ति दें, ये तर्कसंगत नहीं। अतििथ विद्वानों को अभी जो वेतन मिल रहा है, वही दें।
सिंह बोले- योग्यता के अनुसार ही नियुक्ति के नियम बनाए जाएं
कॉलेजों में अतिथि विद्वानों को एडजस्ट करें, लेकिन इससे जो वित्तीय भार आए, उसका भी ध्यान रखें। योग्यतानुसार नियुक्ति देने के नियम बनाएं।
बाला बोले- अतिरिक्त पद बनाएं, ताकि इन्हें एडजस्ट कर सकें
अतिथि विद्वानों का वेतन कम करना समस्या का हल नहीं होगा। अतिरिक्त पदों का निर्माण कर जो अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हैं, उन्हें नौकरी में लिया जा सके।
- हालांकि इस सब से इतर वित्त विभाग का तर्क था कि वेतन पर हर साल 60 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं, ऐसे में नए पद बनने से खर्च और बढ़ेगा। हालांकि मंत्रियों ने इस पर आपत्ति की। कहा- क्या खर्च कम करने के लिए वेतन कम कर दें।
एक्सपर्ट : नियमित करने के ये दो रास्ते भी हैं
- अतिथि विद्वानों को नियमित करने सुपरन्यूमरेरी पद बनाए जा सकते हैं। 1985 में जब तदर्थ नियुक्ति नियमितीकरण के नियम बने, तब राजपत्रित व अराजपत्रित कर्मियों को नियमित किया गया था। 1998 में इसी नियम के तहत 800 सहायक प्राध्यापक नियमित किए गए।
- अतिथि विद्वानों का एक अलग डाइंग कैडर बनाएं यानी जैसे ही वे रिटायर्ड होंगे तो उनका पद खत्म हो जाएगा।-राधावल्लभ शर्मा, रिटायर्ड अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा)
सरकार की सौगात : 1 अप्रैल से 12.55 लाख कर्मचारियों को अब स्वास्थ्य बीमा
सरकार प्रदेश के 12 लाख 55 हजार कर्मचारियों और पेंशनर्स को मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने जा रही है। यह 1 अप्रैल से लागू होगी। इसमें कर्मचारी या उसके परिवार को ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए का इलाज-दवा दी जाएगी। प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए की मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/the-problem-of-guest-scholars-became-just-another-committee-on-the-committee-126434564.html
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