Tuesday, January 7, 2020

एक साल से पेंशन के लिए चक्कर काट रहे टीबी के मरीज, डीटीओ बोले-डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं हो रहे

टीबी के मरीजों को हर माह स्वास्थ्य विभाग देता है 500 रुपए की सहायता राशि

भास्कर संवाददाता| अटेर/ लहार

टीबी के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा 500 रुपए हर महीने दिया जाता है। ताकि टीबी से लड़ने के लिए उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके और अपने इलाज के लिए किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से टीबी मरीजों के लिए यह राहत दी जा रही है। लेकिन अटेर क्षेत्र के आधा सैकड़ा टीबी से ग्रसित मरीजों को सहायता पेंशन पिछले एक वर्ष से नहीं मिली है। मरीज अस्पताल में बाबुओं के चक्कर काटते हैं तो कभी बैंक में पासबुक लेकर पहुंच जाते हैं। इन सभी के बीच अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं।

मरीजों की पेंशन को लेकर जिला डीटीओ संदीप शाक्य से बात की तो उन्होंने बताया कि जुलाई माह में भोपाल से सॉफ्टवेयर बदला गया है। नया साॅफ्टवेयर अपलोड किया गया तो उसमें कुछ पुराने लोगों के खाते डिलीट हो गए। नए खाते डालकर जब प्रक्रिया शुरू की गई तो जिला डीटीओ बदल गए। मैंने जब चार्ज संभाला तो पुराने डीटीओ से डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं हुए। जिला स्तर पर काफी प्रयास के बाद सिग्नेचर अप्रूव नहीं हुए। क्योंकि इसमें हेल्प डायरेक्टर के मोबाइल पर ओटीपी जाती है। जिसके बाद उसे अपलोड किया जाएगा। इस समस्या के समाधान के लिए भोपाल पहुंचकर नए डीटीओ के डिजिटल सिग्नेचर एप्रूव किए गए। जल्द ही पेंडिंग पड़ी पेंशनों को हितग्राहियों के खाते में डाला जाएगा।

जिले में 1 हजार लोगों की पेंशन रुकी: सॉफ्टवेयर बदलने के बाद जिले भर में करीब एक हजार टीबी के मरीजों की पेंशन रुक गई है। हालांकि ढाई से तीन हजार मरीजों की पेंशन जारी की गई है। लेकिन अधिकांश लोगों के खाते व केबायसी डिलीट होने के कारण यह समस्या आ रही है। मरीज स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं कि जानबूझकर उनके द्वारा परेशान किया जा रहा है। सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता राशि महीनों से खातों में नहीं डाली गई है। जिससे दवा, पौष्टिक आहार से लेकर अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इन सभी के बीच अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही सिग्नेचर मैच होते हैं खाते पिछली पूरी राशि डाल दी जाएगी।

परेशानी अटेर, लहार, मेहगांव सहित जिले में केंद्रीय राज्य मंत्रालय की ओर से जारी पेंशन के लिए भटक रहे मरीज

अटेर अस्पताल में पेंशन के लिए लगी मरीजों की लाइन।

अटेर में आधा सैकड़ा लोगों की अटकी पेंशन:

सबसे अधिक परेशानी अटेर क्षेत्र के मरीजों को हो रही है। यहां करीब आधा सैकड़ा से अधिक मरीज हैं जो पेंशन के लिए चक्कर काट रहे हैं। टीबी के मरीज मंसाराम धानुक, अजीत खान, पवन धानुक बताते हैं कि एक साल हो गए हैं लेकिन हर महीने मिलने वाली 500 रुपए की पेंशन उन्हें नहीं मिल पाई है। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में जाते हैं पर टीबी जैसी बीमारी से शरीर की कमजोरी के लिए अच्छा व पौष्टिक खानपान भी आवश्यक होता है। जब पेंशन मिलती थी तो ठीक से गुजारा चल रहा था, पर अब हालाब बिगड़ते जा रहे हैं।

क्षयमुक्त करने का लक्ष्य पिछड़ रहा

मरीजों को सरकारी लाभ दिलाने के लिए विभाग ने डॉक्टरों, क्लीनिक, लैब संचालकों को पाबंद किया है। ताकि वह प्रत्येक मरीज की सूचना विभाग को अवश्य दें। ताकि केंद्र सरकार के लक्ष्य अनुरूप वर्ष 2025 तक जिले को भी टीबी मुक्त किया जा सके। टीबी के मरीज को तब तक पेंशन दी जाएगी, जब तक वह व्यक्ति टीबी की बीमारी से पूर्ण स्वस्थ नहीं हो जाता है। टीबी मरीज इस राशि से न सिर्फ पौष्टिक आहार खरीद सकेगा, बल्कि इलाज के लिए अपने घर से अस्पताल भी आसानी से आ-जा सकेगा।

1 साल से पेंशन के बदले आश्वासन मिलता है

पहले हमें पेंशन हर महीने मिलती थी, लेकिन कई महीने से पेंशन नहीं मिल रही है। इलाज के साथ ही खानपान ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारी सुनते नहीं हैं बस आश्वासन दे देते हैं। पवन धानुक, टीबी मरीज, अटेर

सॉफ्टवेयर चेंज होने की वजह से दिक्कत अाई

सॉफ्टवेयर चेंज होने की वजह से सिग्नेचर मैच नहीं कर रहे थे। परेशानी सुलझा रहे हैं, लेकिन जल्द ही सभी टीबी के मरीजों के खाते में पेंशन की राशि डाली जाएगी। संदीप शाक्य, डीटीओ, जिला टीबी विभाग भिंड



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Bhind News - mp news tb patients circling for pension for one year dto said digital signature matches are not happening


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