यह बातें ज्ञान गंगा महोत्सव के तीसरे दिन बड़ा बाजार में आचार्यश्री पुलक सागर महाराज ने संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि प्रेम को जन्म नहीं दे पाए जीवन में तो कुछ नहीं किया। नरक में तो नारकीय ही रहा करते हैं, जीवन को नरक मत बनाअो। स्वर्ग समान बनाओ। लड़कियां घर की हीरा हैं हीरे की हिफाजत करनी पड़ती है। जो पिता की बात नहीं सुनते वे घर बिगड़ जाते हैं। पिता का गुस्सा बर्दाश्त करो वो तुम्हारे जीवन में उजाला बन कर आएगा। जिस तरह बुखार में दवाई पर विश्वास करते हो वैसे ही पिता के विचारों, बातों पर विश्वास करों। घर की बेटियों को भोजन बनाना सिखाओ, बाहर का भोजन मत खाओ, घर का शुद्ध भोजन बनाओ। जिससे की बीमारी दूर भाग जाएं। क्योंकि लड़के बना रहे पराठे व लड़कियां सीख रही कराटे। ऐसा माहौल घर का मत बनाओ, जो लड़की सुंदर है उसे दर्पण देखने की जरूरत नहीं। दर्पण देखना मना नहीं कर रहा खूबसूरत लड़की दस बार दर्पण देखे पर यह जरूर देखें मेरा चरित्र भी सुंदर है कि नहीं। व्यवहार सुंदर बनाओ चेहरा सुंदर नहीं। वस्त्रों का भी जीवन में प्रभाव पड़ता है। सत्तर प्रतिशत नेचर का प्रभाव पड़ता है जीवन में। यह भीड़ प्रवचन की नहीं व्यवहार भी इसमें समाहित है। युवा बच्चों की सही समय घर बसाने की चिंता करना चाहिए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/sehore/news/mp-news-gyan-ganga-festival-acharyashree-said-in-bada-bazar-on-the-third-day-if-humans-change-their-nature-then-god-can-become-pulak-sagar-063049-6358465.html
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