प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) ने पंचायत राज विभाग समेत अन्य शासकीय कार्यालयों के लिए पिछले साल भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इसके तहत सहायक ग्रेड-3, स्टेनोग्राफर, स्टेनो टाइपिस्ट, डाटा इंट्री ऑपरेटर के सैकड़ों पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। पहले पीईबी ने मेरिट लिस्ट जारी करने में 6 महीने से अधिक वक्त लगा दिया। इसके बाद पंचायत राज विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया 10 महीने अटकाए रखी, जबकि अन्य विभागों ने चयनितों को हाथों-हाथ नियुक्ति दे दी थी।
डीबी स्टार में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने जिला और संभाग स्तर पर कम्प्यूटर ऑपरेटर्स को सितंबर 2019 में नौकरी पर तो रख लिया, लेकिन उन्हें जनवरी 2020 तक वेतन नहीं दिया गया है। प्रदेशभर के कर्मचारी चार महीने से वेतन के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उन्हें आश्वासन देकर टाल रहे हैं। प्रदेशभर की जिला पंचायतों, संभाग आयुक्त कार्यालयों और पंचायत राज विभाग संचालनालय में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने डीबी स्टार को बताया कि वे तीन महीने से वेतन की गुहार लगा रहे हैं। जिलों से लेकर भोपाल तक हर अधिकारी से मिल चुके हैं। जिम्मेदार अधिकारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल देते हैं। अब कह रहे हैं कि ऑपरेटरों को वेतन देने के लिए बजट ही नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि जब अन्य विभाग में नियुक्त कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है तो पंचायती राज के कर्मचारियों के लिए बजट क्यों नहीं है? ज्वाइनिंग देने से पहले अफसरों ने वेतन के लिए बजट मंजूर क्यों नहीं कराया?
कर्मचारियों ने बताया कि वे अपने घरों से सैकड़ों किमी दूर जिला स्तर के शहरों में नौकरी कर रहे हैं। कई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उनके पास मकान किराया से लेकर राशन और दूध-सब्जी के लिए भी रुपए नहीं हैं। नए शहर में होने से किसी से ज्यादा जान-पहचान भी नहीं है, इसलिए अब उन्हें उधारी में कोई सामान देने को राजी नहीं है। मकान मालिक लगातार किराए के लिए तगादा कर रहे हैं। वेतन कब मिलेगा इसे लेकर भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। परिजन अलग परेशान हैं। उन्हें मदद करना तो दूर हर महीने घर आने-जाने का किराया भी चुकाना पड़ रहा है। यदि एक-दो महीने और वेतन नहीं मिला तो पार्ट टाइम प्राइवेट जॉब करने को मजबूर हो जाएंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उन्हें वेतन दिलाया जाए।
वेतन जल्द देंगे
 विभाग के तहत नियुक्त कम्प्यूटर ऑपरेटर्स के वेतन के लिए सप्लीमेंट्री बजट में प्रस्ताव कर चुके हैं। अभी वित्त विभाग से मंजूर नहीं हो पाया है। फाइनेंस में कुछ टेक्निकल इश्यु आ रहा है, जिसे जल्द ही हल कर लेंगे। कर्मचारियों को नियुक्ति दी है तो वेतन भी देंगे। उम्मीद है, जल्द ही बजट आ जाएगा। संदीप यादव, आयुक्त, पंचायत राज विभाग, मप्र
अन्य विभागों में हर माह नियमित मिलता है वेतन**
विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए**
भूखे मरने की नौबत आ गई है
 पंचायत राज विभाग के अधिकारियों ने पहले हमें नियुक्ति के लिए चक्कर कटवाए, अब वेतन के लिए तरसा रहे हैं। हम संचालनालय में अधिकारियों से मिल चुके हैं। कहा जाता है कि बजट ही नहीं है तो वेतन कहां से दें। चार महीने से पगार नहीं मिलने के कारण अब भूखों मरने की नौबत आ गई है। बीएल वर्मा, अभिषेक गुहा, रंजीत अखंड, सुनील खाती (पीड़ित कर्मचारी)
{मामला पंचायत राज विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर की भर्ती का**
उधारी में गुजर-बसर करने को मजबूर
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सितंबर 2019 से नौकरी पर लगे, अब तक नहीं मिली पगार
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पंचायत राज विभाग ने चयनित उम्मीदवारों को पहले 10 महीने ज्वाइनिंग के लिए तरसाया। फिर अब 4 माह से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसकी वजह वित्त विभाग से बजट पारित कराए बिना ही कम्प्यूटर ऑपरेटर्स को नौकरी पर रखना है। विभाग की गलती का खामियाजा ऑपरेटर भुगत रहे हैं।
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DB Star
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/mp-news-first-yearning-for-joining-now-salaries-065542-6412977.html
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