आयोजन समिति ने बताया कि बुधवार की कथा में मुख्य यजमान के रूप मे महेश नामदेव ने अपनी धर्म प|ी सहित व गिरजा पाटकर ने अपनी धर्मप|ी के साथ व्यासपीठ का पूजन करते हुए भागवत भगवान की आरती की। सातवें दिन की कथा में कथा व्यास अनिल कुमार शास्त्री ने कथा में कहा कि जीवन में किए गए सब कर्मों को श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित करें। द्वारका में प्रधान जी का जन्म हुआ, समरासुर द्वारा हरण हुआ। इसके साथ ही प्रद्युम्न द्वारा ही समरा सुर का वध हुआ। सुखदेव महाराज का अंतिम उपदेश इस कलयुग में अनेक दोष हैं, पर एक सद्गुण है कि भगवान का नाम स्मरण करो और भगवान मैं शरणागति प्राप्त करों। जो भगवान का नाम संकीर्तन करते हैं, उनके सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं, जो प्रणाम करते हैं, उनके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं।
अंतिम दिन समिति के सदस्यों ने कथावाचक का सभी ने मिलकर आत्मीय स्वागत किया। समिति ने कथा में प्रतिदिन शामिल होने बाले सभी भक्तजनों, श्रद्धालुओं व माताओं बहनों का हृदय से आभार प्रकट किया। इस अवसर पर श्याम बिहारी पाटकर, लालजी पाटकर मंगल सिंह, लल्लू सोनी, अमित सोनी गुड्डू, उमाशंकर, नीरज नामदेव, पवन सोनी, संजय खरे, विनोद नामदेव, राकेश नामदेव, राजेश सोनी, राजू रैकवार, मुकेश सोनी, मुक्कू खरे, मोहित सोनी, युवा सदस्यों की टोली में सूरज, भरत, लकी, शिब्बू, सत्यम, आंसू, अवी, सचिन, अंकित, हर्ष, गौरव, राज, हर्ष, पृथ्वी, बादल, मुकेश, उमेश, हनी रैकवार आदि मौजूद थे।
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