Tuesday, January 21, 2020

छात्रावास के सभी 50 बच्चे खुजली के शिकार, इलाज नहीं मिला ताे 15 गए घर

यह है यहां का अनुसूचित जाति बालक छात्रावास...। यहां कदम रखते अाैर छात्राें काे अपना परिचय देने के बाद से शुरू हाे जाती है, समस्या अाैर शिकायताें की बाैछार। ये बच्चे अपनी समस्याएं बयां करने काे आतुर थे, लेकिन उनकी सुनने वाला काेर्इ नहीं था। यहां के हर बच्चे काे एक कामन समस्या थी वह थी खुजली की..। यहां के 50 बच्चे सब की सब खुजली से पीड़ित थे। इनमें कुछ ने प्राइवेट डॉक्टर काे बताकर इलाज कराया, लेकिन दोबारा खुजली से ग्रसित हाेने पर वे घर चले गए। इनकी संख्या करीब 15 है। जबकि दूसरे छात्र खुजली के अब तक शिकार हैं। वे छात्रावास अधीक्षक के अस्पताल ले जाने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं छात्रावास अधीक्षक तर्क दे रहे हैं कि यहां की पानी की टंकी में गंदगी हाेने के कारण के इंफेक्शन हाेने से खुजली बीमारी हाे रही है।

वैसे छात्रावास में माह में एक बार स्वास्थ्य जांच के नियम है, लेकिन इन बच्चों काे देखकर ताे यह नियम केवल कागजी नजर अाता है। पिछले एक महीने से छात्र खुजली बीमारी से परेशान हैं। पूछने पर छात्राें ने तपका से कहा, काेई डॉक्टर नहीं अाया अाैर न ही उन्हें काेई अस्पताल तक ले गया। छात्रावास में अव्यवस्था की स्थिति बच्चों के चेहरे पर खुजली फुंसियां दिखा रही थी। हर बच्चे के हाथ, पैर अाैर चेहरे पर फुंसियां थीं। इस खुजलाहट से वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे।

छात्रावास अधीक्षक का तर्क पानी की टंकी में गंदगी हाेने के कारण इंफेक्शन से हाे रही खुजली

अामला। छात्रावास के बच्चे अपनी समस्या बताते हुए।

शाैच के लिए सुबह 5 बजे से कतार लगाते हंै बच्चे

छात्रावास में 50 बच्चे दर्ज हैं। इनके लिए यहां पर 6 शौचालय ंहै, लेकिन इनमें 4 शौचालय पिछले तीन महीनों से सेप्टिक टैंक बंद होने के कारण चालू नहीं है। छात्र गुलाब, संदीप के अनुसार सुबह 5 बजे से उठने के बाद बच्चे कतार लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इस इंतजार के दौरान उन्हें शारीरिक रूप से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हॉस्टल में पानी के लिए दो टंकियां हैं। छात्रों का कहना है कि इनमें से एक की सफाई कुछ महीनों पहले करवाई थी, लेकिन दूसरी टंकी की कई साल से सफाई नहीं हुई है।

खाने व ओढऩे के लाले, बच्चे घर से लेकर अाए कंबल

छात्र शिवम, गुलाब के अनुसार इस हफ्ते 15 बच्चे खुजली से पीड़ित हाेने के कारण गांव चले गए हंै। छात्राें की संख्या कम होने से खाना ठीक मिल रहा है, लेकिन जब पूरे बच्चे छात्रावास में रहते हैं, तब भरपेट खाना नहीं मिल पाता। जबकि सुबह 8 बजे का नाश्ता और भोजन भी देरी से मिलता है। छात्रों के अनुसार ठंड अधिक पड़ने के कारण कुछ छात्रों को अभी 2 कंबल दिए हैं, लेकिन शिवम अाैर प्रियांशु सहित अन्य ने कंबल उपलब्ध नहीं होने से घर जाकर कंबल सहित ठंड से बचने की सामग्री लेकर अाए हैं। ऐसे हालातों में ये बच्चे ठंड का सामना कर रहे हैं।

दाे माह से बंद खेलकूद, खेल सामग्री भी नहीं

छात्रावास के बच्चों के पास वर्तमान में खेलकूद के लिए एक भी साधन नहीं है। करीब दो महीने पहले इनकी फुटबाॅल, वालीबॉल खराब हुई तब से इन्हें दूसरा कोई साधन हॉस्टल प्रबंधन ने उपलब्ध नहीं करवाया। छात्र सचिन के अनुसार पढ़ाई करने के बाद मनोरंजन करने की काेई सुविधा नहीं है।

छात्रावास के बच्चे खुजली से परेशान हैं, ताे अधीक्षक काे डॉक्टर काे दिखाया जाना चाहिए। यह बात अभी नालेज में अाई है। अधीक्षक से इस संबंध बाेला जाएगा। -शिल्पा जैन, असिस्टेंट कमिश्नर, ट्राइबल विभाग

फंगल इंफेक्शन कीड़ा से हाेती है खुजली

बच्चों को फंगल इंफेक्शन या कीड़े के कारण यह परेशानी हो सकती है। कीड़ा चमड़ी में छेद कर शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद वही अंडे देकर पनपने लगता है। यह बहुत सूक्ष्म होता है। बच्चों की इस परेशानी की सूचना हॉस्टल प्रबंधन से अभी तक नहीं मिली है। सूचना मिलती तो रुटीन चैकअप कैंप लगाकर कर बच्चों का इलाज कराया जाता है। -डाॅ. अशाेक नरवरे, बीएमओ

जांच करवाएंगे

इस संबंध में अभी सूचना मिली है। इसकी तत्काल जांच करवाई जाएगी। अधीक्षक को बच्चों की उचित देखभाल के निर्देश भी दिए जाएंगे। यह सब देखना छात्रावास अधीक्षक की जिम्मेदारी है। सृष्टि डेहरिया, नायब तहसीलदार

पानी में खराबी के कारण पैदा हुई समस्या

पानी की टंकी में गंदगी के कारण बच्चों काे इंफेक्शन हाेने से खुजली हाे रही थी। टंकी का पानी काे साफ करा दिया है। शौचालय की व्यवस्था बनार्इ जा रही है। -अारएन धुर्वे, अधीक्षक, बालक छात्रावास अामला



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Amla News - mp news all 50 children of the hostel suffered from itching no treatment found 15 went home


source https://www.bhaskar.com/mp/betul/news/mp-news-all-50-children-of-the-hostel-suffered-from-itching-no-treatment-found-15-went-home-063017-6450885.html

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