Friday, January 10, 2020

एआईसीसी व पीसीसी के बीच बना गतिरोध नहीं होने दे रहा िनगम मंडलों में नियुक्तियां

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एअाईसीसी) के महासचिव और मप्र के प्रभारी दीपक बावरिया ने निगम-मंडलों में नियुक्तियों में हो रही देरी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि निगम-मंडलों में नियुक्तियों की देरी की वजह एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी नेताओं के बीच बना गतिरोध है। बावरिया यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि प्रदेश के बड़े नेता मुगालते में न रहें, चुनिंदा लोगों को रेवडियां नहीं बांटने देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को निगम-मंडलों में जगह लेगी। निगम-मंडलों में नियुक्ति के लिए एआईसीसी ने गाइडलाइन तैयार की है, जिसके अनुसार ही नियुक्तियां की जाएंगी। कई मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों ने बावरिया के इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि निगम-मंडलों में नियुक्ति कब करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। बावरिया ने सार्वजनिक बयानबाजी कर सत्ता और संगठन के बीच संघर्ष पैदा कर दिया है, जो पार्टी के लिए फायदेमंद नहीं है। यह पहला मौका है जब किसी किसी महासचिव ने पहले फोन कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा की और मीडिया के सामने सार्वजनिक तौर पर पार्टी को लेकर ही बयानबाजी की।

बयान पर बवाल कांग्रेस महासचिव व प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया बोले-

प्रतिक्रिया... अनुशासन की सीख देने वाले ही उसका पालन नहीं कर रहे हैं

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अभी तक परंपरा यह रही है कि निगम मंडलों में नियुक्ति मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। हां यह जरूर है कि जब मुख्यमंत्री को कहीं कोई जरूरत होती है तो वे एआईसीसी से मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं या केंद्रीय नेतृत्व जिन्हें एडजस्ट किया जाना है, उनके नाम भेज देता है और निगम मंडल में उन्हें सम्मलित कर लिया जाता है। यहां तो इसका उलट ही हो रहा है। पार्टी का महासचिव ही अनुशासन तोड़ रहा है, जबकि वे खुद दूसरों को अनुशासन में रहने की बात करते हैं।

बावरिया ने शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ से की मुलाकात

बावरिया ने शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। दोनों के बीच बंद कमरे में बात हुई। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम-मंडलों में एेसे लोगों की नियुक्तियां की जाएंगी जिन्होंने पार्टी के लिए बीते 15 सालों में संघर्ष किया। पार्टी के संघर्षशील और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जगह दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान यह भी संकेत दिए कि सार्वजनिक तौर पर पार्टी के अंदरूनी मुद्दों पर चर्चा ठीक नहीं है। अनुशासन के भीतर ही सभी समस्याओं का समाधान निकल सकता है।

निगम मंडलों में नियुक्ति के मापदंड

मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए बुंदेलखंड-3, बघेलखंड से 1, मालवा से 4 तथा मध्यभारत, महाकौशल, निमाड़ और ग्वालियर-चंबल से 5-5 मंत्री शामिल किए गए हैं। इस सब कवायद में 22 िजलों को प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश के जिन 30 जिलों को मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिली है, वहां के विधायकों, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को निगम-मंडलों में एडजस्ट किया जाएगा। एेसे सीनियर विधायक जो मंत्री नहीं बन पाए हैं, उन्हें निगम-मंडलों की नियुक्ति में मौका दिया जाए। उन विधायक और जिला अध्यक्षों को प्राथमिकता दी जाए जिनके जिलों से मंत्रिमंडल में किसी भी विधायक को स्थान नहीं मिला है। संगठन में सक्रिय रहने वाले नेताओं को स्थान दिया जाएगा। महिलाओं और युवाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।



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Bhopal News - mp news appointments in corporate boards are not allowing deadlock between aicc and pcc


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