उनका संकल्प था कि चाहे प्राण चले जाएं वह बिना प्रभु दर्शन के वापस नहीं जाएंगे। श्री द्वारकाधीश ने उनके दृढ़ निश्चय और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर न सिर्फ दर्शन दिए वरन उनके यहां बड़े भाई बलराम के साथ आने का वरदान दिया। यह बात भाल बामौरा में चल रही श्री भगवान रामदेव की कथा सुनाते हुए दूसरे दिन पंडित हरिनारायण पाठक ने कही। भगवान द्वारकानाथ के अवतार की कथा को गति देते गुरुदेव ने कहा कि पहले बलराम राजा अजमल के यहां रानी के गर्भ से जन्म लेंगे। उसके बाद में स्वयं भी अवतार लूंगा। मेरे अवतार लेने का कारण यह भी है कि मरुधरती पर भैरव राक्षस का आतंक है। उसका वध कर प्रजा को आतंक से मुक्त करुंगा। कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि गर्भ में रहने वाला शिशु ईश्वर भक्ति का वादा भगवान से करता है लेकिन गर्भ से बाहर आकर सब भूल जाता है। जिस ईश्वर ने हमें मानव बनाकर धरती पर भेजा है उनको कभी नहीं भूलना चाहिए। रात या दिन जब भी समय मिले भगवान की भक्ति सच्चे भाव से करना चाहिए।
श्रोताअों को कथा सुनाते गुरुदेव महाराज।
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source https://www.bhaskar.com/mp/vidisha/news/mp-news-if-the-devotion-of-the-devotee-is-true-then-god-has-to-come-gurudev-maharaj-072556-6325774.html
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