Sunday, January 5, 2020

धार के नौशाद, कुमकुम और लक्षिता ने गोल्ड और आयुषी ने जीता कांस्य पदक

काता की विशेष विधाएं जिनसे करते हैं आत्मरक्षा

बुनकाई काता-यह काता का प्रायोगिक प्रदर्शन कहलाता है।

बस्साईदाई-यदि किसी को चार लोगों ने घेर लिया है उस समय में यह प्रकार काम आता है। इसे किला तोड़कर प्रवेश करना कहते हैं यानी पहले किले का द्वार तोड़ो और अंदर प्रवेश करो।

कांकूदाई-इसमें अर्धचंद्राकार स्टेप से शुरू होता है, यदि कोई पीछे से पकड़ ले तो इस विधा का प्रयोग करते हैं। दोनों हाथों को सिर से गोल घुमाते हुए नीचे लाते हैं फुर्ती के साथ पीछे वाले पर कोहनी को पीछे ले वार करते हैं।

जीऑन-पैरों के बीच कितना अंतर रखकर सामने वाले पर अटैक के लिए मुद्रा का चयन करना। इसमें पैरों के बीच का अंतर काता करने वाले को संतुलन प्रदान करता है। साथ ही अपनी पोजिशन लेने में सहायता करता है।

साइफा-यह भी कराते का एक प्रकार है इसके गोजू कहते हैं। इसके अलावा सिहोदाई प्रकार का भी उपयोग करते हैं।

राज्य स्तरीय स्पर्धा कुमिते में धार के खिलाड़ियों का रहा दबदबा

भास्कर संवददाता | धार

लड़कों से अधिक लड़कियां काता विधा के खेल में रुचि लेने लगी हैं ताकि जीवन में विपरीत परिस्थिति से निपटने में वे सक्षम बन सकंे। काता में 105 तरीके से आत्मरक्षा की जा सकती है, जबकि कुमिते फाइट खेल तक सीमित है। काता और कुमिते को ही कराते कहा जाता है। करा यानी खाली और ते यानी हाथ, कराते यानी खाली हाथों से आत्मरक्षा की कला। प्रदेश के 30 जिलों के करीब 1100 बच्चों में करीब 450 बालिकाएं धार में चल रही राज्य स्तरीय कराते चैंपियनशिप में भाग ले रही हैं। कराते विशेषज्ञ एवं प्रदेश के कराते के तकनीकी निदेशक राजेंद्रसिंह तोमर ने भास्कर को खिलाड़ियों से विभिन्न स्टेप्स करवाकर आत्मरक्षा के तरीके बताए।

तोमर ने बताया कि काता विधा पूर्व निर्धारित आक्रमण एवं बचाव की तकनीकियों का संयोजन है। अलग-अलग परिस्थितियाें में आत्मरक्षा के लिए काता का उपयोग किया जाता है। इसमें 105 तरीके हैं, जिनसे बचाव किया जा सकता है। कुमिते में शरीर और फेस को टच नहीं करना होता है इसलिए यह खेल तक सीमित है।

काता मुकाबले में बचाव और रक्षा के तरीकों का प्रदर्शन करते खिलाड़ी।

एक काता में होती हैं 20 से 25 तकनीक : तोमर ने बताया कि एक काता में कम से कम 20 से 25 तकनीकियां होती हैं। कराते का अर्थ ही काता होता है। फाइट नहीं होता। काता आत्मरक्षा के लिए होता है। कराते में आक्रमण नहीं होता बल्कि बचाव है। जब तक खुद को बचाएंगे नहीं तब तक आक्रमण कैसे करेंगे। बचाव किसी से भी हो सकता है।

शरीर के इन अंगों पर ग्रिप का महत्व है : अचानक होने वाले हमले में यदि किसी लड़की या लड़कों की गर्दन, कमर या हाथ पकड़ लिया हो, नीचे पटक दिया हो उस पर बैठ गया हो तो इसमें ग्रिप का विशेष महत्व होता है। सामने वाले को काता से पराजित किया जा सकता है।



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Dhar News - mp news naushad kumkum and lakshitha of dhar won gold and ayushi won bronze medal


source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-naushad-kumkum-and-lakshitha-of-dhar-won-gold-and-ayushi-won-bronze-medal-072524-6324828.html

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