Friday, December 20, 2019

नौ पुष्टि भक्ति केंद्रों पर निकाली प्रभातफेरी, पालना महोत्सव और उत्सव दर्शन कराए

विट्ठलानाथजी की जयंती के मौके पर शहर सहित जिलेभर के सभी पुष्टिमार्गीय भक्ति केंद्रों पर शुक्रवार सुबह प्रभात फेरियां निकाली गईं। पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर जयंती के अवसर पर अखंड नाम जप, प्रभातफेरी, विशेष मनोरथ, पालना महोत्सव, तिलक आरती आदि कार्यक्रम हुए। शहर के जूना ब्यावरा गोवर्धन चौक स्थित गोवर्धननाथ जी मंदिर से सुबह 8 बजे अंतरराष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद एवं श्रीवल्लभ युवा मंडल ने विट्ठलनाथजी की प्रभात फेरी निकाली। इसमें शामिल श्रद्धालु भजनों की प्रस्तुतियां देतेे हुए शहर के सभी प्रमुख मार्गों से होकर गुजरे। रास्ते में जगह- जगह विभिन्न संगठन और संस्थाओं ने प्रभात फेरी का स्वागत किया। आखिर में ये वापस मंदिर पहुंची। गोवर्धननाथ जी के उत्सव दर्शन और तिलक आरती के बाद प्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

राजगढ़, सुठालिया, खिलचीपुर, पचोर एवं तलेन में भी हुए कार्यक्रम: विट्ठलानाथजी की जयंती पर ब्यावरा के अलावा राजगढ़, खिलचीपुर, जीरापुर, तलेन, सुठालिया, पचोर, मधुसूदनगढ़ सहित जिले के सभी 9 पुष्टि भक्ति केंद्रों पर कार्यक्रम हुए। शहर में निकाली गई प्रभात फेरी में गिरिराज करोड़िया, पुरुषोत्तम भानेज, राजेश भानेज, गिरिराज पगारा, गिरिश भानेज, आशिष गुप्ता, अजय भानेज, रवि गुप्ता, नितिन सिंघी, राधेश्याम चेला, दीपेश भानेज, गोपाल नामदेव, जगदीश टाटा, बद्रीलाल नामदेव, मोहन गौड़, मुकुट गुप्ता, श्याम भानेज, सुमित गौड़, मोहित करोड़िया, तलेन कुमार, रमेशचंद्र, आशुतोष, जितेंद्र सक्सेना सहित अन्य शामिल थे।

अंतरराष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद ने ब्यावरा सहित जिले के 9 पुष्टि भक्ति केंद्रों पर मनाया गुंसाई विट्‌ठलनाथ जी का 504वां प्रकटोत्सव

अंतरराष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद व श्रीवल्लभ युवा मंडल ने विट्ठलनाथजी के 504वें प्राकट्य उत्सव पर शुक्रवार सुबह शहर में प्रभात फेरी निकाली।

पुष्टिमार्ग के प्रणेता श्रीमद् वल्लभाचार्य के सिद्धांतों को प्रचारित करने में विट्ठलनाथ जी की अहम भूमिका रही

श्रीवल्लभ युवा मंडल जिलाध्यक्ष गिरिराज गुप्ता पगारा ने बताया कि पुष्टि भक्ति मार्ग वल्लभ संप्रदाय का विस्तार करने में गाेसाईं विट्‌ठलनाथ जी का प्रमुख योगदान रहा। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के अनुग्रह मार्ग के तहत पुष्टिमार्ग के प्रणेता श्रीमद् वल्लभाचार्य के सिद्धांतों को प्रचारित करने में विट्‌ठलनाथ जी की अहम भूमिका रही। इसके लिए मंदिर में वार्ता प्रसंग भी हुआ। इसमें वक्ताओं ने कहा कि मुगल काल में जब सनातन धर्म पर प्रहार किए जा रहे थे, ऐसे विपरीत समय में श्रीमद् विट्‌ठलनाथ जी ने भक्ति मार्ग पर चलकर सनातन हिन्दू संस्कृति को स्थिर रखने में बड़ा योगदान दिया। संवत 1572 में पौष कृष्ण नवमी को महाप्रभु के श्रीमद् वल्लभाचार्य के यहां श्री विट्‌ठलनाथ जी ने जन्म लिया था। उन्होंने श्रीमद् भागवत सुबोधनी पर टीका, विद्वान मंडल नामक ग्रंथ में शुद्धाद्वैत का प्रतिपादन करते हुए गीताजी पर चार ग्रंथ प्रथम अध्याय का तात्पर्य, गीता तात्पर्य, गीता के लिए, न्यायादेश विवृत्ति की रचना सहित संगीतमय कई पदों एवं स्रोतों की रचना की। उनकी कुश्ती, घुड़सवारी, चित्रकला, संगीत इत्यादि में बहुत रूचि थी।



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Biyawara News - mp news have prabhatferi cradle festival and utsav darshan conducted at nine confirmed bhakti centers


source https://www.bhaskar.com/mp/rajgarh/news/mp-news-have-prabhatferi-cradle-festival-and-utsav-darshan-conducted-at-nine-confirmed-bhakti-centers-065504-6227179.html

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