औसतन हर वर्ष डेढ़ करोड़ का होने वाला राखी का कारोबार इस साल बिगड़ने के आसार हैं। लॉकडाउन के कारण अक्सर दुकानें बंद रहने के साथ ही व्यापारियों को ऑर्डर करने के बाद भी अब तक माल ही नहीं मिल पाया। जिन व्यापारियों को माल मिल चुका है, वे भी संक्रमण के खतरे के कारण अभी अच्छा कारोबार नहीं कर पाए। पिछले साल की तुलना में इस अब तक सिर्फ 30 फीसदी कारोबार ही हो पाया है।
ज्ञात रहे 3 अगस्त को रक्षाबंधन है। इस पर्व पर राखी का कारोबार करने वाले व्यापारियों के सामने इन दिनों परेशानी खड़ी हो गई है। ट्रांसपोर्ट बंद होने से व्यापारियों ने रक्षाबंधन के लिए जो माल दिल्ली, मेरठ, सूरत से आर्डर किया था, वह अब तक शहर नहीं पहुंचा। जिनका माल आया वह भी लेट आया है। ऐसे में अब सिर्फ 5 दिन की कमाई के बचे हैं। राखी के व्यापार में भारत-चीन के बिगड़े संबंध के कारण इस बार मात्र 10% ही माल चाइना का दिखाई देगा, जो लॉकडाउन के पहले महानगरों के बड़े व्यापारियों द्वारा चीन से खरीदा जा चुका है। व्यापारियों के अनुसार इस बार देश में भी लॉकडाउन के चलते घरेलू महिलाओं द्वारा बनाई जाने वाली राखियां भी कम मात्रा में बनी है। क्योंकि लघु उद्योग के जरिए राखी बनाने वाली महिलाएं इस वर्ष मास्क तथा पीपीई किट बनाने में लगी रहीं। इस कारण सस्ती राखियां बाजार में कम मात्रा में उपलब्ध है। वर्तमान में शहर में एक से लेकर 200 रुपए तक की राखी है
नई सड़क स्थित सांई फैंसी स्टोर के संचालक और राखी के थोक व्यापारी नरेश मोटवानी बताते हैं कि शहर में रक्षाबंधन से जुड़े आइटम विक्रय करने वाली बड़ी 35 दुकानें हैं। 100 से ज्यादा त्योहारी कारोबारी हैं। प्रत्येक दुकान पर कम से कम सीजन में एक लाख से ज्यादा का कारोबार होता है तथा इस त्योहार पर औसतन डेढ़ करोड़ का व्यापार शहर में होता है। परंतु इस बार अभी तक 30% ही व्यापार हुआ है तथा शेष बचे हुए दिनों में 70% माल सेल करना है, जो मुमकिन नहीं लग रहा। व्यापारी अपना पुराना तथा जो इंदौर से सप्लाई हुआ माल बेच रहे हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shujalpur/news/due-to-the-closure-of-the-transport-the-goods-of-the-order-did-not-even-get-five-days-traders-feared-the-festival-worsening-127562971.html
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