चरक हॉस्पिटल में नागझिरी क्षेत्र की चिंताबाई पति अर्जुन मालवीय को 24 जुलाई को हॉस्पिटल में भर्ती किया था। 2 दिन बाद परिवार के लोगों से ब्लड का इंतजाम के लिए कहा। 26 जुलाई को परिवार के लोगों ने ब्लड की व्यवस्था की तो स्टाफ ने ब्लड चढ़ाने से इनकार कर दिया। स्टाफ का कहना था एमवाय इंदौर ले जाओ। यहां डिलीवरी नहीं हो पाएगी। कुछ हो गया तो हमारी जवाबदारी नहीं रहेगी। यह सुन परिवार के लोग बोले आप रैफर कर दीजिए। स्टाफ का कहना था आप लिखकर दीजिए कि हम स्वेच्छा से पेशेंट को ले जा रहे हैं। 26 जुलाई को परिवार के सदस्यों ने लिखकर दिया उसके बाद वे महिला को पुष्पा मिशन हॉस्पिटल लेकर गए, जहां आधे घंटे में डिलीवरी हो गई। मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। गायनिक विभाग की प्रभारी डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया उस दौरान किसकी ड्यूटी थी, जानकारी निकलवाई है। सिविल सर्जन ने भी कागज निकलवाने की बात कही है।
रोज दो से तीन गर्भवती रैफर
चरक हॉस्पिटल में हर दिन दो से तीन गर्भवती महिलाओं को इंदौर रैफर किया जाता है। हालांकि जिम्मेदारी से बचने के लिए यहां के डॉक्टर और स्टाफ संबंधित महिला व उनके परिवार से लिखवाकर ले लेते हैं।
रैफर करने के ये तीन बड़े कारण
01.डॉक्टर व स्टाफ ड्यूटी से बचते हैं और रिस्क नहीं लेना चाहते।
02.प्राइवेट हॉस्पिटल को लाभ पहुंचाने के लिए चरक में मरीज की केयर नहीं करते।
03.नॉर्मल डिलीवरी भी नहीं की जाती है।
मामले की पूरी जांच की जाएगी
सिविल सर्जन डॉ. आरपी परमार ने बताया मैं आज ही पेशेंट के भर्ती पर्चे आदि निकलवाता हूं। क्या कारण रहे कि महिला की डिलीवरी चरक में नहीं की जा सकी। इसकी पूरी जांच होगी।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/charaka-hospital-worth-93-crores-made-referral-center-after-recruiting-pregnant-for-three-days-told-family-take-him-to-indore-127562404.html
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