ऋषभदेव बावन जिनालय में आचार्यश्री नित्यसेनसूरीजी की आज्ञनुवर्ती साध्वीश्री विद्वतगुणाश्रीजी और साध्वीश्री रश्मिगुणाश्रीजी विराजित हैं। कोरोना काल के चलते प्रवचन स्थगित हैं। नवकार मंत्र आराधना घरों में की जा रही है।
शहर में 30 से अधिक आराधक घर से आराधना कर रहे हैं। इसके चलते मंगलवार को साध्वीश्री विद्वगुणा श्रीजी ने लिखित संदेश में नवकार आराधना की महिमा बताई। समाज के लिए जारी संदेश में उन्होंने बताया नवकार मंत्र की आराधना करने से व्यक्ति के अशुभ कर्मों की स्थिति घट जाती है और आत्मा को शुभ कर्मों की ओर अग्रसर करता है। शुभ से शुद्ध की ओर बढ़ता है। साध्वीश्री ने कहा इस मंत्र में किसी व्यक्ति की स्तुति नहीं की गई है बल्कि गुणों की स्तुति की गई है अतः सभी मंत्रों में श्रेष्ठ है। इस मंत्र में सार और पार का समावेश है। सार से सुख मिलता है और पार से दुख मिटता है। यह नवकार मंत्र जन्म मरण के चक्र को समाप्त कर देता है और व्यक्ति की आत्मा श्रेष्ठ स्थान को प्राप्त करती है। साध्वी श्री ने बताया कि चौदह पूर्व ग्रंथों का सार है नवकार मंत्र। उन्होंने आराधना करने वालों से आग्रह किया कि यदि आपके जीवन में नवकार स्थापित हो गया तो जीवन प्रकाश मय हो जाएगा और यही प्रकाश आत्मा को अलौकिक कर देगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/jhabua/news/worshiping-the-navkar-mantra-reduces-the-state-of-inauspicious-deeds-127562960.html
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