दरअसल, नगर निगम ने कुछ दिन पूर्व नया फरमान जारी किया है, जिसमें सभी व्यापारियों को निगम से ट्रेड लाइसेंस लेने के निर्देश दिए गए हैं। शनिवार को चेंबर भवन में आयोजित बैठक में सीनियर एडवोकेट विनोद भारद्वाज, एडवोकेट प्रशांत शर्मा व एडवोकेट विवेक जैन ने बताया कि नगर निगम अधिनियम में दिए गए प्रावधानों में केवल कुछ ही व्यापार के संबंध में लाइसेंस लेने की बाध्यता है। प्रत्येक व्यापारी को लाइसेंस लेने के लिए बाध्य करना नियम विरुद्ध है। डायवर्सन शुल्क के संबंध में भी विशेषज्ञों ने बताया कि मास्टर प्लान में भूमि का उपयोग शासन द्वारा निर्धारित किया जाता है। यदि जमीन का उपयोग शासन ने बदला है तो उसका शुल्क नागरिकों से नहीं मांगा जाना चाहिए। इसमें शासन को नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। इस दौरान चेंबर के अध्यक्ष विजय गोयल व अन्य पदाधिकारियों ने सर्व सम्मति से इस मामले में संभाग आयुक्त एमबी ओझा को ज्ञापन देने का निर्णय लिया। सचिव डाॅ. प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि आगामी दिनों में चेंबर सभी पार्षदों, विधायकों व मंत्रियों को बुलाकर चर्चा करेगा। चेंबर ने व्यापारियों से ट्रेड लाइसेंस नहीं बनवाने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि निगम ने लाइसेंस बनवाने के लिए व्यापारियों पर दबाव बनाया तो चेंबर इसका पुरजोर विरोध करेगा।
विशेषज्ञों के साथ बैठक करते चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-meeting-law-experts-said-obligation-of-trade-license-against-rules-080701-5957595.html
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