Thursday, November 28, 2019

बैंक के लिए मंजूर आधार का सिस्टम चल रहा था प्राइवेट दुकान पर, 50 की जगह ले रहे थे 500 रु.

गुना/कुंभराज | बीनागंज में गुरुवार को प्राइवेट दुकान पर आधार कार्ड बनाने और अपडेट किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर तहसीलदार और ई-गवर्नेंस विभाग के अधिकारी ने पूरा सिस्टम जब्त कर लिया। जांच में यह खुलासा हुआ कि यह सिस्टम बीनागंज के निचला बाजार स्थित मध्यांचल ग्रामीण बैंक के लिए स्वीकृत हुआ था पर मैनेजर ने उसे एक प्राइवेट व्यक्ति को बैंक से करीब आधा किमी दूर एक निजी जगह पर चलाने के लिए दे दिया। जबकि आधार बनाने या अपडेट करने का काम अब सिर्फ सरकारी परिसरों मेंे ही हो सकता है। तहसीलदार विजय पाल और उदय सिंह जाटव के अलावा ई-गवर्नेंस विभाग में असिस्टेंट मैनेजर अमित राणा ने यह कार्रवाई की। यह सिस्टम भरत सोनी नामक एक युवक संचालित कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि बैंक में आधार बनाने या अपडेट करने के लिए 500 से 1000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। जांच में पता चला कि बैंक में तो यह सिस्टम है ही नहीं। इसे किसी प्राइवेट शख्स के हवाले कर दिया गया है। बैंक परिसर से 300 मीटर दूर यह सिस्टम हमने तुरंत जब्त कर लिया। इसे चला रहा व्यक्ति तय शुल्क से कई गुना ज्यादा पैसे वसूल रहा था।

ये है नियम

सिर्फ सरकारी परिसर में ही चल सकता है सिस्टम, अधिकारी के पास ही रहता है आईडी-पासवर्ड

बाहरी व्यक्ति से काम भी नहीं कराया जा सकता, सरकारी संस्थाओं के कर्मचारियों को दी गई है इसकी ट्रेनिंग

ऐसे लीक हुआ मामला : प्राइवेट कियाेस्क संचालकों ने की थी शिकायत

दरअसल इस मामले में प्राइवेट कियोस्क संचालकों की ओर शिकायत पहुंची थी। दरअसल अवैध तौर पर चल रहे इस आधार सेंटर पर लोगों को प्रिंट आउट भी निकलकर दिए जा रहे थे। जबकि जहां आधार बनता या अपडेट होता है, वहां से प्रिंट आउट देने का प्रावधान है ही नहीं। निजी कियाेस्क संचालकों को इससे नुकसान हो रहा था। इसलिए यह मामला खुलकर सामने आ गया।

एक माह से चल रहा था गड़बड़झाला : अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार बैंक में करीब एक माह पूर्व यह सिस्टम लगाया गया था। बताया जाता है कि शाखा का परिसर छोटा है और इस सिस्टम के बाद लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। मैनेजर ने इसका हल यह निकाला कि उन्होंने सिस्टम को बाहर ले जाने की अनुमति दे दी। जबकि वह जगह कम होने का हवाला देकर इसे किसी और सरकारी परिसर में शिफ्ट करवा सकते थे। पर उन्होंने एक निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया।

आगे क्या

इस मामले में अब बैंक मैनेजर को नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही बैंक के रीजनल मैनेजर को भी सूचना पत्र जारी होगा। यह गंभीर स्तर की गड़बड़ी है। यह लोगों के निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला है। मैनेजर प्रभात जैन से भी इस संबंध में बात की गई। उनका कहना था कि जगह कम होने की वजह से सिस्टम को बाहर ले जाने को कहा गया था।

क्या है नियम

संचालन : आधार बनाने या उसमें किसी तरह के सुधार करने का काम सिर्फ सरकारी संस्था की इमारत या परिसर में ही हो सकता है। बैंक और डाकघर जैसे संस्थानों में इस काम के लिए वहीं के कर्मचारियों को खास तौर पर ट्रेंड किया गया है।

प्रिंट आउट : आधार नंबर जनरेट होने के बाद आवेदक को एक पर्ची दी जाती है। इससे वह आधार का प्रिंट आउट किसी निजी कियोस्क से निकलवा सकता है। सरकारी परिसर में स्थित सिस्टम पर यह सुविधा नहीं दी जा सकती है।

शुल्क : नए आधार पंजीयन के लिए कोई शुल्क नहीं लगता। अपडेशन के लिए 50 रुपए शुल्क का प्रावधान है। इससे ज्यादा वसूलने पर कार्रवाई हो सकती है।



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source https://www.bhaskar.com/mp/guna/news/mp-news-the-sanctioned-aadhaar-system-for-the-bank-was-running-at-the-private-shop-replacing-the-500-for-50-082549-6053718.html

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