Monday, November 25, 2019

बैतूल से खिलवाड़; माचना में जहां से पीने का पानी लेती है नपा, उससे 200 मी. ऊपर मिल रहा नाला

शहर के पीने का पानी खींचने के लिए माचना नदी पर बने हुए इंटक वेल से कुछ दूर ऊपर गंदा नाला सीधे नदी में मिल रहा है। इसने पेयजल गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर दिया है। बैक्टीरिया का खतरा रहता है। यह गंदा पानी कॉलोनियों का आ रहा है जो फिल्टर प्लांट की जमीन से हाेकर ही निकल रहा है। इसने ग्राउंड मॉनीटरिंग के लिए तैनात पेयजल शाखा के अफसरों के निरीक्षणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएमओ का दावा है कि संबंधित कॉलोनाइजर को नोटिस दिया जाएगा।

विवेकानंद वार्ड और ग्रीन सिटी का नाला प्लांट के किनारे और खेतों के बगल से होता हुअा यह नाला माचना नदी में मिल रहा है। यह नाला जहां मिलता है, उसके 200 मीटर आगे ही इंटकवेल बना हुआ है जहां से पानी खींचकर फिल्टर प्लांट भेजा जा रहा है। पेयजल सिस्टम के ऊपर बने नाले को बंद नहीं करने से सवाल खड़े हो रहे हैं। नपा के पास नाले के गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर साफ करवाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

पानी की सुरक्षा के नाम पर कागजी खानापूर्ति, स्वच्छ पानी के दावों पर सवाल

बैतूल। इंटकवेल के पास माचना नदी में मिलता हुआ नाला, नदी का वह हिस्सा जहां गंदगी मिल रही है।

नाले पर दो जगहों पर डाले हैं सीमेंट के पाइप

नाले का यह पानी माचना नदी तक पहुंचाने के लिए फिल्टर प्लांट की जमीन के बाहरी हिस्से में बड़े सीमेंट के पाइप डाले गए हैं। इसी तरह एक पुलिया बनाकर इसके ऊपर से रास्ता निकाला गया है, वहीं इसके नीचे पाइप के जरिए नाले का पानी माचना में जाने का रास्ता बनाया गया है।

माचना से राेज लिया जाता है 67 लाख लीटर पानी

नपा रोजाना माचना नदी से 67 लाख लीटर पानी लेती है। इस पानी को फिल्टर कर 9 पानी टंकियों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद शहर के 19 हजार नल कनेक्शनधारियों के पास तक यह पानी पहुंचता है। तीन महीने पहले अगस्त तक नगरपालिका पेयजल सप्लाई ताप्ती के पानी से कर रही थी।

नपा के फिल्टर प्लांट की जमीन से गुजरता है नाला

नपा की फिल्टर प्लांट क्षेत्र की 17 एकड़ जमीन है। इस जमीन को कवर करने के लिए बाउंड्रीवॉल बनाई जा रही है। खास बात यह है कि यह नाला बाउंड्रीवॉल के भीतर फिल्टर प्लांट की जमीन पर ही है। जानकारी के अनुसार बाउंड्रीवॉल बनाने वाले ठेकेदार ने ही ये पाइप डालकर नाले का पानी निकालने की व्यवस्था बनाई है।

ई-कोलाई की 260 कॉलोनी निकली थी

नगर पालिका ने फिल्टर प्लांट पर ही जांच लैब बना रखी है। यहां जांच करने के लिए एक्सपर्ट नहीं हैं। 2014 में पीएचई ने माचना नदी में एनीकट के समीप रॉ वाटर के सैंपल लिए थे 260 कॉलोनी ई-कोलाई एक लीटर पानी में निकला था।

संबंधित काॅलाेनाइजर्स काे नोटिस देंगे

माचना नदी पर बने माचना एनीकट से हम पेयजल के लिए पानी लेते हैं। इस स्थान के आसपास का पानी स्वच्छ रखने के लिए लगातार मॉनीटरिंग करते हैं। माचना नदी बहुत लंबी है इसमें कई जगह पर नाले मिलते हैं। वैसे माचना किनारे कॉलोनी बनाने वाले लोगों को ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की शर्त पर ही एनओसी दी जाती है। इस नाले के संबंध में जानकारी ली जाएगी, जरूरत पड़ने पर संबंधितों को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रियंका सिंह, सीएमओ, नपा

निकासी के पानी में हो सकते हैं बैक्टीरिया

घरों से निकले हुए निकासी के पानी में बैक्टीरिया जैसे ई-कोलाई हो सकते हैं। इनसे पाचन तंत्र खराब होने और संक्रमण का खतरा होता है। बैक्टीरिया ज्यादा मात्रा में हो तो नुकसान हो सकता है। एके खान, रिटायर इंजीनियर, पीएचई



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Betul News - mp news messing with betul 200 meters from where napa takes drinking water in machana sewer up
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source https://www.bhaskar.com/mp/betul/news/mp-news-messing-with-betul-200-meters-from-where-napa-takes-drinking-water-in-machana-sewer-up-064011-6028189.html

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