एससी-एसटी आरक्षण काे संविधान की नाैवीं अनुसूची का अंग बनाने के लिए कांग्रेस विधायक महेश परमार, रामलाल मालवीय, भाजपा के सांसद अनिल फिराेजिया द्वारा राष्ट्रपति काे पत्र लिखकर मांग की गई है। जाे सामान्य और पिछड़ा वर्ग की जातियों के साथ न सिर्फ भेदभाव है, बल्कि अत्याचार है। इसके विरोध में अभा क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भेरूसिंह चाैहान व जिलाध्यक्ष जीवनसिंह तंवर, जिला संगठन मंत्री गजराजसिंह पंवार के नेतृत्व में सामान्य व ओबीसी वर्ग की संयुक्त बैठक का अायाेजन किया गया। इसमें डी.के. चाैधरी ने बताया अगर एससी-एसटी आरक्षण संविधान की नौवीं अनुसूची का अंग बन जाता है तो कोई भी अनुसूचित जाति या जनजाति का व्यक्ति किसी सामान्य वर्ग या पिछड़े वर्ग के व्यक्ति के खिलाफ पुलिस मे शिकायत करता है तो बिना जांच के तुरंत गिरफ्तारी होगी। कोर्ट एससी-एसटी आरक्षण की किसी भी प्रकार से समीक्षा भी नहीं कर पाएगा। सांसद अनिल फिरोजिया व विधायकों द्वारा की गई यह मांग न सिर्फ सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग पर अत्याचार होगा, बल्कि यह भारतीय नागरिक के मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन करता है। सामाजिक न्याय विभाग की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट में अनुसूचित जाति को प्रताड़ित करने के 5347 मामले झूठे पाए गए, जबकि अनुसूचित जनजाति के 912 मामले झूठे साबित हुए। वर्ष 2015 में एससी-एसटी कानून के तहत न्यायलय द्वारा 15638 मुकदमों का निपटारा किया गया, जिसमें से 11024 मामलों में अभियुक्त को
बरी कर दिया गया या निर्दोष साबित हुए। किसी भी विषय मे पहले जांच होती है फिर दोषी साबित होने पर गिरफ्तारी और
सजा होती है। लेकिन बिना जांच के गिरफ्तारी का नियम उल्टी गंगा बहाने जैसा विनाशकारी साबित होगा। बैठक मे सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के बुद्धिजीवी लोगों द्वारा एससीएसटी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने की घोर निंदा की गई। साथ ही सभी जिले, तहसील व नगरों में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक महेश परमार और रामलाल मालवीय के खिलाफ लोकतांत्रिक जन आंदोलन करने और विरोध स्वरूप पुतला दहन करनेकी रूपरेखा भी बनाई गई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/nagda/news/sc-st-reservation-to-make-part-of-the-ninth-schedule-of-the-constitution-will-burn-effigies-of-public-representatives-who-write-letters-127486593.html
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