जिला मुख्यालय से लगभग 17 किमी दूर बिलपांक में अति प्राचीन वीरुपाक्ष महादेव मंदिर है। पुरातत्व विभाग ने मंदिर के कंगूरे टूटने व छत से पानी का रिसाव रोकने के लिए काम शुरू करवाया था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से यहां काम बंद हो गया है।
विरुपाक्ष महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहां जिले के अलावा कई शहरों से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। कोरोना महामारी के चलते इस मर्तबा श्रावण मास में भक्तों की संख्या भले की कम हो जाए, लेकिन भक्तों की आस्था कम नहीं होगी। यह मंदिर गुर्जर चालुक्य शैली (परमार कला के समकालीन) का मनमोहक उदाहरण है। श्रावण मास के पूर्व इस मंदिर के कंगूरों की मरम्मत करने और मंदिर की छत की वाटर प्रूफिंग की जाना थी। इसको लेकर पुरातत्व विभाग ने इंदौर के पवन शर्मा को ठेका दिया। लॉकडाउन के कारण वर्तमान में उक्त निर्माण कार्य बंद है।
लेबर नहीं होने के कारण काम रुका हुआ है
ठेकेदार पवन शर्मा ने बताया 70 कंगूरे लगाने थे जो लगा चुके हैं। वाटर प्रूफिंग करना था। इसके लिए मंदिर के छत की खुदाई कर दी गई और केमिकल भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण सभी लेबर चले गए हैं। लेबर सागर और बिहार क्षेत्र के थे। जो पानी का रिसाव पहले होता था वहीं होगा, खुदाई से प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेबर आते ही काम शुरू कराएंगे।
बारिश में आएगी परेशानी
मंदिर की छत से पानी का रिसाव होने के कारण वाटर प्रूफिंग का काम करवाना था। ठेकेदार ने लॉकडाउन के पहले मंदिर की छत की खुदाई कर प्लास्टर हटा दिया है। इससे इस मर्तबा बारिश में पानी अधिक रिसाव होने का अंदेशा है। ग्रामीण संजय पाटादीर, मुकेश परमार, विनोद भगत, दीपक पाठक, सुभाष भगत ने बताया श्रावण मास में बारिश होने पर यहां आने वाले भक्तों को मंदिर की छत से पानी के रिसाव से परेशानी होगी। साथ ही मंदिर भी इस रिसाव के चलते कमजोर हो सकता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/excavation-of-the-roof-of-virupaksha-mahadev-temple-will-cause-trouble-in-the-rain-127482760.html
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