स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग घटा दी है। अब केवल पॉजिटिव मरीज के परिवार के उन्हीं सदस्यों या कांटेक्ट वाले लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं, जिनमें कोरोना के लक्षण हो। बाकी लोगों के सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं, उन्हें होम क्वारेंटाइन किया जा रहा है। पॉजिटिव मरीजों के बढ़ते आंकड़े को कम करने के लिए यह फंडा अपनाया जा रहा है, जिसमें परिवार के ही सदस्य के भी सैंपल लिए जा रहे हैं। एक सैंपल की टेस्टिंग में ढाई से तीन हजार रुपए का खर्च आ रहा है, इस खर्च को कम करने के उद्देश्य से भी सैंपलिंग कम की जा रही है। इसके पहले मरने वालों के सैंपल लेना भी बंद किए जा चुके हैं। उन्हीं मृत लोगों के सैंपल लिए जाते हैं, जिनमें कोई लक्षण पाए गए हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि केवल लक्षण वाले लोगों के ही सैंपल लिए जा रहे हैं। जिन लोगों में लक्षण नहीं उनके सैंपल लेने की आवश्यकता नहीं है।
पत्नी पॉजिटिव, पति-बेटे के सैंपल 4 दिन बाद लिए
तीन बत्ती के समीप रहने वाले परिवार की महिला 20 मई को पॉजिटिव पाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला के पति और बेटे के ही सैंपल नहीं लिए। परिवार के लोगों ने दबाव बनाया, तब जाकर 24 मई को उनके सैंपल लिए गए और बाद में परिवार के अन्य 8 लोगों के सैंपल लिए गए।
ये तीन बड़ी वजह सामने आई :
- मरीजों के बढ़ते आंकड़े को कम करना।
- सैंपल की टेस्टिंग के खर्च को कम करना।
- अस्पताल में मरीजों की भीड़ कम करना।
हर दिन 260 से 300 सेंपलिंग करने की जरूरत
वर्तमान में 25 से 26 मरीज हर रोज पॉजिटिव आ रहे हैं। इनके परिवार के सदस्य और कांटेक्ट के 10 लोग भी हैं तो हर रोज 260 से 300 लोगों की सैंपलिंग होना चाहिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/sampling-occurred-in-which-samples-taking-only-their-symptoms-close-relation-also-did-not-check-127344545.html
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