Friday, May 29, 2020

श्मशानों में रात गुजारी, 500 किमी पैदल चलकर अपने गांव आए, अब फिर काम की तलाश

काम की तलाश में दूसरे राज्यों में गए सैकड़ों मजदूर परिवारों को कोरोना त्रासदी और लॉकडाउन की बेरोजगारी ने उल्टे पैर घर भेज दिया। कोई पैदल-पैदल 500 किमी चलकर लौटा। रास्ते में संक्रमण के डर से बस्ती में रुकने नहीं दिया तो श्मशान में रात गुजारी। किसी ने पूरी बचत ट्रक या अन्य निजी वाहन चालकों को किराये के रूप में चुकाई तब घर पहुंचे। अब ये सभी यहां बेरोजगार हैं। पंचायत स्तर पर मनरेगा के काम शुरू कर रोजगार देने के प्रयास शुरू हुए लेकिन कुछ जगह ये भी नहीं है।

हनुमंतिया पहले बारिश ने तबाह किया, अब कोरोना ने छीन लिया रोजगार
1300 आबादी का गांव हनुमंतिया सितंबर 2019 में अतिवृष्टि के कारण ओवरफ्लो हुए रूपनिया जलाशय के पानी में डूब गया था। कई परिवार बेरोजगार व बेघर हुए। यहां कालबेलिया समाज की बस्ती ने भी त्रासदी झेली तो पेट पालने 35 परिवार गुजरात-राजस्थान चले गए। काना नाथ पत्नी सुंदरबाई व दो बच्चों के साथ 4 महीने पहले जोधपुर मकान निर्माण की छुट्टी मजदूरी करने गए थे। 300 रुपए रोज की मजदूरी कर रहे थे कि मार्च में लॉकडाउन से रोजगार छीन लिया। कुछ दिन चावल खरीदकर खाए लेकिन भविष्य के ठिकाने नहीं और साधन नहीं मिले इसलिए 500 किमी पैदल चलकर यहां आए। रास्ते में लोगों ने रुकने नहीं दिया तो मुक्तिधाम में रात गुजारी। शिवनाथ पत्नी संगीता व बच्चों के साथ गुजरात गांधीनगर पत्थर फैक्टरी में काम कर रहे थे। 200 किमी पैदल चले, फिर ट्रक में बैठकर यहां आए। पंचायत सचिव किशोर सेन, सहायक सचिव अनिल धाकड़ ने कहा बाहर से लौटे 35 परिवारों को मनरेगा में काम देने के लिए फॉर्म भर रहे हैं। जिनके जॉब कार्ड नहीं, उनके नए बनाएंगे।

पिपल्याजोधा महाराष्ट्र, गुजरात से लौटे

पिपल्याजोधा ने सितंबर 2019 की बारिश में त्रासदी झेली थी। 36 लोग काम करने गुजरात, महाराष्ट्र गए थे। भेरूलाल ने बताया लॉकडाउन में परेशान होकर लौट आए लेकिन भविष्य की चिंता है। पंचायत मनरेगा में काम दे रही लेकिन आगे क्या होगा। पंचायत सचिव प्रभुलाल शिकारी, सहायक सचिव अर्जुन भाटी ने कहा 268 जॉब कार्डधारी के साथ बाहर से आए 36 मजदूरों के लिए तलाई व फलोद्यान का काम शुरू किया है।
माननखेड़ा 18 हजार मेंतमिलनाडु से आए
माननखेड़ा नई आबादी के रमेश खारोल ने कहा बस्ती के 8 लोग खेती-बाड़ी नहीं होने से तमिलनाडु सीमेंट फैक्टरी में काम करने गए थे। दो महीने चावल खाकर गुजारा किया, रोजगार ठप होने से बचत के 18 हजार रुपए एक ट्रक वाले को देकर घर लौट आए। पंचायत सचिव नरेंद्रसिंह पंवार, सहायक सचिव समरथ पाटीदार ने कहा प्रवासी समेत 150 मजदूरों के लिए नरेगा में तलाई निर्माण शुरू कर दिया है। पंचायत मदद करेगी।

सीईओ- प्रवासी मजदूरों को मनरेगा कार्यों में खुली छूट

जनपद सीईओ आरबीएस दंडोतिया ने बताया जनपद में दूसरे राज्यों से 1150 तथा दूसरे जिलों से करीब 500 मजदूर आए हैं। इन को मनरेगा कार्यों में खुली छूट है। किसी के पास जॉब कार्ड नहीं है तो बनाकर देंगे। वे पंचायत में संपर्क करें। ढोढर का प्रस्ताव तकनीकी रूप से सही नहीं है। जिस लोकेशन पर उन्होंने तलाई निर्माण का प्रस्ताव भेजा, वहां पंच बद्रीलाल ने आपत्ति ली। इसलिए नए प्रस्ताव मंगवाए हैं, जल्द स्वीकृत करेंगे।



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हनुमंतिया में मनरेगा फॉर्म भरवाते पंचायत सचिव।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/jaora/news/spend-the-night-in-the-crematorium-walk-500-km-to-my-village-now-look-for-work-again-127353206.html

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