कलेक्टोरेट विभाग से आवेदक ने सूचना का अधिकार लगाकर कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जानकारी नहीं मिलने पर आवेदक ने उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। जिस पर संज्ञान में लेकर मप्र मुख्य सचिव को तलब किया गया।
आवेदक ओमप्रकाश प्रजापति ने अगस्त 2019 में आरटीई के तहत आवेदन किए थे। चार अपील प्रकरणों में 15 से 20 बिंदुआें की जानकारी मांगी गई थी। जिसमें जिला निर्वाचन कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी का नाम और नियुक्ति आदेश, लोकसभा निर्वाचन 2019 में आवंटन हुई राशि का व्यय प्रमाणक, डॉ. अनिल गुप्ता पलेरा तहसीलदार किस नियम व उप नियम के तहत आसीन है, टीकमगढ़ जिले की समस्त तहसीलों में कितने लिपिक पदस्थ है। जिस पर जिले के लोक सूचना अधिकारी ने प्रश्नात्मक जानकारी बताकर आवेदन निरस्त कर दिया था। इसके बाद राज्य सूचना को शिकायत की थी। फिर इसके बाद अपीलीय अधिकारी कलेक्टर को लिखित में प्रथम अपील की। जहां अपील लेने से इंकार कर दिया। ओमप्रकाश ने बताया कि यहां से जानकारी नहीं मिलने के बाद मानव अधिकार आयोग में शिकायत की गई।
विधानसभा में आरटीआई का मुद्दा उठाया
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग भारत सरकार को पत्र जारी किया। जहां से उन्होंने इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच के आदेश दे दिए हैं और मुख्य सचिव मप्र को प्रकरण की जांच करके कार्रवाई के निर्देश दिए है। वहीं चंदला विधायक राजेश प्रजापति ने भी विधानसभा में आरटीआई का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा अधिकारियों से जानकारी मांगते हैं तो किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती है।
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source https://www.bhaskar.com/mp/chhatarpur/news/mp-news-under-rti-information-is-not-being-given-to-the-applicant-many-times-complaint-in-personnel-and-training-department-065544-6224171.html
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