Thursday, December 5, 2019

रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला रोका, विकास दर अनुमान 6.1% से 5% किया

रिजर्व बैंक ने उम्मीद के विपरीत ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला रोक दिया। आरबीआई ने बढ़ती महंगाई दर को नियंत्रित रखने की कोशिशों को अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती पर तरजीह दी है। गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.15% और रिवर्स रेपो रेट को 4.9% पर बरकरार रखने का फैसला किया गया। बैंकर्स और अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के मकसद से लगातार छठी बार ब्याज दरों में कटौती करेगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अपना अनुमान 6.1% से घटाकर 5% कर दिया है। सितंबर तिमाही में भारत की विकास दर सिर्फ 4.5% रही थी। शेष|पेज 4 पर





यह पिछले छह साल में सबसे कम तिमाही ग्रोथ है। पिछले साल सितंबर तिमाही में विकास दर 7% थी।

दास ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती को विराम देना अस्थाई है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक लगातार पांच कटौतियों में ब्याज दरों को 135 बेसिस प्वाइंट कम चुका है। अब वह इसके असर की समीक्षा करना चाहता है। पहले इतनी कटौती का असर सामने आ जाए फिर आगे इस बारे में कोई फैसला लिया जाएगा। दास ने यह भी कहा कि बैंकों ने ग्राहकों तक सिर्फ 44 बेसिस प्वाइंट कटौती का फायदा पहुंचाया है। रेट कट के असर को ज्यादा से ज्यादा करने की जरूरत है। बैठक के बाद एमपीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विकास और महंगाई दर के बीच संतुलन को देखते हुए इस बार कटौती के सिलसिले को थामने का फैसला लिया गया है।



रियल एस्टेट कंपनियों ने निराशा जताई

ब्याज दरों में कटौती नहीं किए जाने के के फैसले से रियल एस्टेट कंपनियों ने निराशा जताई है। नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘उद्योग जगत रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती की उम्मीद कर रहा था। इस फैसले से हमें निराशा हुई है।’नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और एमडी शिशिर बैजल ने कहा कि रिजर्व बैंक का फैसला हैरान करने वाला है। इससे उद्योग में निराशा है। ब्याज दरों में कटौती से कर्ज की मांग बढ़ती और अर्थव्यवस्था को अधिक निवेश मिलता।’ एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ‘यदि नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती होती तो होम लोन की दर पहली बार घटकर आठ प्रतिशत से नीचे आ जाती। इससे सेक्टर को मजबूती मिलती।’

बढ़ती महंगाई दर बनी ब्रेक की वजह

दास ने कहा कि अक्टूबर में महंगाई दर 4.6% रही। यह उम्मीद से कहीं ज्यादा है। रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 4.7-5.1% किया था। महंगाई दर के लिए मीडियम टर्म गोल 4% का रखा है। अक्टूबर में महंगाई दर इस लक्ष्य से आगे निकल गया लिहाजा ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला रोकना पड़ा।

रोजगार के अवसर नहीं बनेंगे

केयर रेटिंग एजेंसी के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा कि विकास दर का अनुमान घटने से रोजगार के नए अवसर नहीं पैदा होंगे। साथ ही छंटनी का खतरा भी बढ़ेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट समीर नारंग ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही से विकास दर फिर से ट्रैक पर आ जाएगी।





मुथूट फाइनेंस के एमडी जॉर्ज एलेक्जेंडर मुथूट ने कहा कि आरबीआई का फैसला हमारी उम्मीदों के अनुसार ही है। आरबीआई ने खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमत और महंगाई दर में इजाफे में के कारण यह सावधानी बरती है। महंगाई का दबाव हटने के बाद सेंट्रल बैंक और कटौती कर सकता है।

आरबीआई के फैसले का आप पर असर

फिक्स्ड डिपॉजिट : इसमें निवेश करने वालों के लिए राहत। एफडी पर मिलने वाले ब्याज में कटौती का सिलसिला थमेगा।

एमसीएलआर लिंक्ड लोनः आमतौर पर बैंक 6 महीने से एक साल की रीसेट डेट के साथ एमसीएलआर लिंक्ड लोन ऑफर करते हैं। ये यथावत रह सकते हैं।

बेस रेट लिंक्ड लोनः जिनके पास बेंचमार्क प्राइम लेंडंग रेट(बीपीएलआर)आधारिक लोन है, उन्हें एक्टर्नल बेंचमार्क लिंकिंग पर स्विच करना चाहिए। इसमें ज्यादा पारदर्शिता है।





नए कर्जधारकः नए लोन ग्राहकों को बाहरी बेंचमार्क से लिंक्ड लोन ही मिलेगा। भविष्य में अगर कोई रेट कटौती होती है तो ईएमआई घट जाएगी।



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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-reserve-bank-stopped-the-cut-in-interest-rates-growth-rate-estimate-from-61-to-5-082023-6109623.html

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