सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरछा में इन
दिनों दो-दो बीएमओ को पदस्थ कर दिया गया है। यह बदलाव स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नहीं, बल्कि वहां पदस्थ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूदेव मेहता को बचाने के लिए किया गया।
कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद लगातार काम में लापरवाही
सहित अन्य शिकायतों को लेकर सीएमएचओ डॉ. पीवी फुलम्बीकर ने सुंदरसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ डॉ. सुमित यादव को बेरछा के विकासखंड चिकित्सा अधिकारी के सारे
प्रशासनिक अधिकार साैंप दिए। इधर,
इससे पहले वहां पदस्थ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेहता को नहीं हटाया। इस कारण वित्तीय अधिकार अब भी डॉ. मेहता के ही पास हैं।
डॉ. मेहता काम में लगातार लापरवाही कर रहे थे, स्टाफ भी विरोध में
कुछ दिन पहले हुए इस बदलाव को लेकर महकमे में इन दिनों खासी चर्चा है। कुछ डॉक्टरों ने तो एक स्वास्थ्य केंद्र पर दो लोगों को पदस्थ करना नियम विरुद्ध बता दिया। मामले की पड़ताल करने पर यह बात सामने आई कि डॉ. मेहता लगातार लापरवाही कर रहे थे। उनकी कुछ अन्य आदतों को लेकर भी वहां पदस्थ कर्मचारियों से लेकर शाजापुर तक का स्टाफ विरोध में खड़ा हो गया। सभी कर्मचारियों ने कलेक्टर दिनेश जैन को डॉ. मेहता की शिकायत करते हुए उन्हें वहां से तत्काल हटाने की मांग की।
वित्तीय अधिकार डॉ. मेहता के पास
गंभीर आरोपों को देखते हुए कलेक्टर जैन ने डॉ. मेहता को बेरछा से हटाने के लिए सीएमएचओ डॉ. पी.वी. फुलम्बीकर को निर्देश दिए। इस पर सीएमएचओ डॉ. फुलम्बीकर ने डॉ. मेहता की जगह बेरछा स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार डॉ. सुमित यादव को सौंप दिया। उन्होंने सारे प्रशासनिक अधिकार प्राप्त करने संबंधी आर्डर जारी कर दिया। लेकिन इससे पहले सीएमएचओ ने पहले से वहां पदस्थ डॉ. मेहता को हटाने का आदेश जारी नहीं किया। ऐसे में फिलहाल सारे वित्तीय अधिकारी डॉ. मेहता के पास ही हैं, जबकि कोरोना सहित इलाज संबंधी अन्य सारे काम डॉ. यादव को दे दिए गए हैं।
शिकायत मिली थी
मामले में कलेक्टर दिनेश का कहना है कि बेरछा में पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी की शिकायत मिली थी। कोरोना के दौरान वे सही रिपोर्टिंग आदि भी नहीं कर पा रहे थे। कोरोना के खतरे के दौरान एक्टिव डॉक्टर को ही ऐसी जगह रखा जाना चाहिए। इसी को लेकर सीएमएचओ को निर्देश दिए थे। सीएमएचओ ने दूसरे डॉक्टर को बीएमओ बना दिया है।
डॉक्टरांे की जरूरत के कारण डॉ. मेहता को बचाना पड़ा
सीएमएचओ डॉ. पी.वी. फुलम्बीकर ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के गंभीर आरोप संबंधी शिकायतें और उनकी लापरवाही को देखते हुए उन पर सख्त कार्रवाई होना थी, लेकिन कोरोना के खतरे के दौर में डॉक्टरों की पहले से कमी है। ऐसे में उन पर कार्रवाई करना वर्तमान परिस्थिति में उचित नहीं था। कर्मचारियों की शिकायत के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी के सारे अधिकार डॉ. यादव को दे दिए हैं। उन्हें फिलहाल वहां बतौर मेडिकल ऑफिसर के रूप में रखा गया है। यदि बीएमओ डॉ. मेहता को हटाते तो उन पर कार्रवाई करना पड़ती, लेकिन वे सीनियर डॉक्टर हैं और कोरोना खतरे के बीच सीनियर डॉक्टर पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां डॉ. यादव को बीएमओ बना दिया गया है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shajapur/news/without-superseding-dr-mehta-dr-sumit-yadav-of-sundarasi-took-charge-127524984.html
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