हरिनारायण शर्मा,लॉकडाउन के दौरान गुरु के प्रति आस्था का उदाहरण देखने को मिला। कोरोना से बेखौफ इंदौर के 40 उद्योगपति और व्यापारी सारी सुख-सुविधाएं छोड़ अपने बच्चों के साथ आचार्य विद्यासागरजी की शरण में 80 दिन से ज्यादा रहे। इनमें से कुछ परिवार तो अभी भी चातुर्मास के लिए रुके हैं। गुरु के सान्निध्य में सभी उन्हीं के जैसी दिनचर्या का पालन करते और सात्विक आहार लेते हैं। आचार्यश्री से शिक्षा ग्रहण करते हैं। उनके कक्षों में न टीवी है और न अन्य सुविधाएं। आचार्यश्री के प्रवास में व्यवस्थापक दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के कमल अग्रवाल, राहुल सेठी बताते हैं लॉकडाउन बढ़ते गए पर किसी ने भी जाने की इच्छा नहीं जताई।
गुरु की शरण में सीखा कम सुविधाओं में जीना
गुरु के सान्निध्य में इतने दिन तक रहे व्यवसायी प्रमोद जैन बताते हैं कि उनके साथ पत्नी रिशू और 14 साल का बेटा आभास भी था। इस दाैरान एक बार पैर टूट गया, एक बार हाथ में मोच आ गई, फिर भी भक्ति में ही लीन रहे। रेडिमेड कारोबारी संजय मेक्स और भरतेष बड़कुल बताते हैं कि गुरु की शरण में सीख मिली कि कम सुविधाओं में भी सुकून से जिया जा सकता है। वायर ट्रेडिंग सप्लायर सिंपल और अंकिता जैन कहती हैं 24 मार्च की रात 8 बजे पीएम ने पहले लॉकडाउन की घोषणा की तभी तय कर लिया कि गुरु के पास जाना है। 40 परिवारों कोे यह सौभाग्य मिला।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/disaster-created-opportunity-40-business-families-spent-more-than-80-days-in-lockdown-at-vidyasagar-ji-127479460.html
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