Thursday, December 19, 2019

परमात्मा के दर्शन करने हैं तो सबसे पहले संतों से मार्गदर्शन लें: शास्त्री

भास्कर संवाददाता | अमायन/सुरपुरा

संतों की संगति से बढ़कर कोई भक्ति नहीं है। जीवन में यदि सफल होना है तो अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा सा समय निकाल कर संतों के सानिध्य में समय गुजारें। संत वह औषधि है जो हमारे समस्त विकारों का एक साथ हरण करते हैं।

उक्त वचन अमायन के विजयगिरि बाबा के मंदिर पर चल रही भावगत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को पंडित राधाकृष्ण शास्त्री ने कहे। उन्होंने संतों की इस गरिमामय महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि संत हृदय नवनीत समाना, कह सुसंत पर कह नहीं जाना। पर संताप द्रवय वननीता, पर दुख द्रवय सुसंत पुनीता। अर्थात संत का हृदय नवनीत के समान होता है, किंतु नवनीत सिर्फ दूसरों के संताप का हरण करता है। संतों के मार्गदर्शन से ही परमात्मा के दर्शन प्राप्त किए जा सकते हैं।

अपनी बुराइयों को दूर करें: इधर कोषढ़ में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन सर्वेश्वरी देवी ने कहा जीवन में सफलता के लिए मनुष्य को बुराइयों से दूर रहना पड़ेगा। जब मनुष्य बुराइयों से दूर होगा तो अपने आप ही सफलता मिलेगी। भागवात कथा भी मनुष्य को बुराइयों से दूर कर सही मार्ग दिखाती है। भागवत कथा ज्ञान का भंडार है जो मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है।

अमायन में कथा का श्रवण करते श्रोता।



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