Tuesday, August 25, 2020

सड़कों के खेल में गेंद बन गए राहगीर, उछलते, िगरते, पड़ते सफर करने हो रहे मजबूर, शहर की अधिकांश सड़कों के उड़ गए धुर्रे

शहर में अभी 30 इंच के करीब बारिश हुई है और सड़कों के हाल ये हैं जैसे बाढ़ आ चुकी हो। डामर की सड़कें टूट नहीं रहीं बल्कि घुल रही हैं। ऐसे में यही प्रश्न कौंधता है कि आखिर नगर निगम के ठेकेदार कौन सा डामर लगाते हैं जो बारिश में घुलने लगता है। ऐसा नहीं कि हर सड़क के यही हाल हों लेकिन अधिकांश सड़कें तो हर बारिश में जर्जर हो जाती हैं। सड़कों का टेंडर जब दिया जाता है तो शर्त होती है कि तीन सालों तक सड़कों की देखरेख ठेकेदार ही करेगा लेकिन किसे याद रहता है कि कौन सी सड़क कब बनी थी और मरम्मत कौन कराएगा। नगर निगम बारिश के बाद सड़कों की मरम्मत के लिए ही करोड़ों रुपए फूँक देता है और उसके कुछ ही दिनों बाद नए सिरे से सड़कों का टेंडर जारी हो जाता है। कुल मिलाकर सड़कों के खेल में करोड़ों रुपयों का बारा-न्यारा होता है।
इन दिनों लोग जर्जर सड़कों पर चलने के िलए मजबूर हैं। विजय नगर जैसा पॉश एरिया हो जहाँ एमआरफोर है, घमापुर-रद्दी चौकी मार्ग, घमापुर-सतपुला मार्ग, दमोहनाका-आईटीआई मार्ग, अधारताल-परियट सड़क, गढ़ा की अधिकांश सड़कें, गोलबाजार सर्किल, रानीताल-कछपुरा मार्ग सहित कई सड़कें लगभग पूरी तरह टूट चुकी हैं। इनमें बड़े-बड़े गड््ढे हो गए हैं और दुर्घटनाओं की आशंका बनने लगी है। वैसे तो हर साल सड़कों के जर्जर होने पर बारिश को ही दोष दिया जाता है लेकिन इस बार तो अभी इतनी बारिश नहीं हुई है और इसलिए अब दोष नगर निगम के ठेकेदारों और अधिकारियों को दिया जा रहा है िक आखिर उन्होंने कैसी सड़कें बनवाईं।

ब्लो में टेंडर देने का खामियाजा है
नगर िनगम के अधिकारियों का कहना है िक शहर की वे सड़कें जो कि 4 या 5 साल पहले बनीं थीं वही खराब हुई हैं और अब उनकी मरम्मत कराई जाएगी। इस मामले में दबी जुबान से अधिकारियों का यह भी कहना है कि मान लीजिए हमने किसी सड़क को बनाने के लिए एक करोड़ का इस्टीमेट बनाया और सरकारी गाइडलाइन के अनुसार टेंडर उसे ही देना है जो सबसे कम रेट डालेगा। किसी ने 80 लाख रुपए में सड़क बनाने का टेंडर भरा तो हमें उसे ही टेंडर देना होगा। अब जब सड़क बनाने का इस्टीमेट ही 1 करोड़ है तो ठेकेदार 80 लाख में क्या सड़क बनाएगा और क्या बचत करेगा। यही हाल अधिकांश मामलों में होता है।

मिल सकता है इस समस्या से छुटकारा
निगम अधिकारियों के साथ ही कई अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में यदि डामर की बजाय कांक्रीट की अधिकांश सड़कों का िनर्माण हो तो हर साल सड़कों की मरम्मत से बचा जा सकता है। टेंडर जारी करते समय काॅस्ट का ध्यान रखा जाए, ब्लो में टेंडर न दिया जाए, निर्माण के समय अधिकारी और पार्षद कड़ी नजर रखें, हर सामग्री की लैब में टेस्टिंग हो, सड़क का बेस मजबूत डाला जाए।

बारिश में भी होगी मरम्मत
बताया जाता है कि नगर निगम ने अब पुराने पैटर्न को बदला है जिसमें बारिश के बाद ही सड़कों की मरम्मत कराई जाती थी। अब हर जोन से अभी ही प्रस्ताव माँगे गए हैं िक उनके जोन की कौन सी सड़क खराब हो रही है और उसके लिए क्या किया जाए। जोनों से प्रस्ताव आने शुरू हो चुके हैं। अधिकारियों ने कहा िक कुछ सड़कें जैसे अमखेरा, अधारताल-परियट, दमोहनाका आदि में बड़े-बड़े गड््ढे हैं इसलिए उनमें अभी हार्ड मुरुम भरवाई जाएगी ताकि बड़े वाहन फँसे नहीं और आवाजाही में कोई परेशानी न हो। वहीं शहर की कुछ सड़कों की ऊपरी परत गायब हो रही है जिनकी मरम्मत के लिए हार्ड मुरुम काम नहीं करेगी बल्कि बिटुमिन से काम होगा इसलिए जैसे ही बारिश थोड़ी रुकेगी यह काम कराया जाएगा।

हर सड़क पर नजर है
हमने हर जोन को यह निर्देश दिए हैं कि सड़काें पर निरंतर नजर रखी जाए और जहाँ भी बड़े गड््ढे होते हैं भले ही उनमें ईंटों और हार्ड मुरुम का मलबा भरा जाए लेकिन गड््ढे खुले नहीं रहने चाहिए। इसके साथ ही जैसे ही बारिश रुकेगी हम तेजी से मरम्मत के कार्य कराएँगे। वैसे तो वे ही सड़कें ज्यादा खराब हो रही हैं जो 3 साल पहले बनीं थीं लेकिन यदि गारंटी पीरियड की सड़कें खराब हुईं तो ठेकेदारों पर निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।
अजय शर्मा, अधीक्षण यंत्री नगर निगम



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In the game of roads, the balls became passersby, bouncing, falling, forced to travel, most of the roads of the city were blown away


source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/in-the-game-of-roads-the-balls-became-passersby-bouncing-falling-forced-to-travel-most-of-the-roads-of-the-city-were-blown-away-127653581.html

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