मुंबई में कोरोना भले अभी भी बेकाबू है। इसके बावजूद रोजगार की तलाश में हजारों लोग एक बार फिर सपनों की नगरी मुंबई का रुख करने लगे हैं। सागर होकर यूपी के अलग जिलों से महाराष्ट्र के पुणे, उल्हासनगर, अकोला आदि शहर जा रहे ये लोग बहेरिया तिराहा, नरसिंहपुर रोड या भोपाल रोड पर मुंबइया टैक्सियों समेत देखे जा सकते हैं।
बहेरिया तिराहा पर भोजन के लिए रुके इन लोगों का कहना है कि आखिर कब तक हम कोरोना के डर अपने-अपने गांव-घरों में दुबके रहें। सरकार ने जब पर्याप्त सावधानियों के साथ सामान्य जन-जीवन शुरु कर दिया है तो फिर रुकना ठीक नहीं है। कुछ देर भले लगेगी, जिंदगी पटरी पर आ ही जाएगी। रास्ते में कोई परेशानी नहीं हो इसलिए अधिकांश टैक्सी ड्राइवर खाने-पीने के सामान के साथ-साथ पेट्रोल भी लेकर चल रहे हैं।
मकान मालिक की बाइक लौटाने साथ चल रहे भतीजे
यूपी के सीतापुर जिले से लौट रहे विजयसिंह ठाकुर ने बताया कि हम लोग मई के पहले सप्ताह में लौट आए थे। अब वापस कुर्ला में टैक्सी चलाएंगे। विजय ने बताया कि लॉक डाउन ने दुनिया के कई चेहरे दिखाए। लेकिन ज्यादातर सहानुभूति और मदद से भरे थे। उन्हीं में से एक चेहरा हमारे मकान मालिक अमोल राव का था।
स्कूलें बंद हैं, इसलिए बच्चों को घर पर ही छोड़ आए
उल्हासनगर में टैक्सी चलाने वालों की एक टोली जिसमें करीब 12 टैक्सी ड्राइवर थे। ये सभी प्रयागराज जिले के अलग-अलग गांवों से आ रहे थे। इनमें से फूलसिंह यादव, लालमणि दुबे ने बताया कि आखिर क्या करते घर रुक कर। वैसे भी हर दूसरे-तीसरे दिन बैंकों से किस्त जमा करने फोन आ रहे हैं। Ãआजमगढ़ से लौट रहे लल्लनराम भदोही का कहना है कि जो भी हुआ, अच्छा नहीं हुआ। मैं अपने बुजुर्ग पिता को लेकर घर पहुंचा तो चंद दिन बाद ही उनकी मौत हो गई।
संभवत: चिलचिलाती धूप में बिना भोजन-पानी के सफर ने उन्हें तोड़ दिया था। इधर जब महीने भर पहले मैंने अपने मकान मालिक को लौटने के बारे में फोन किया तो उसने कहा कि तुम्हारे कमरे मैंने किसी दूसरे को ज्यादा किराया मिलने पर दे दिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/life-came-on-the-way-mumbai-taxis-started-appearing-on-the-forelane-people-returning-from-up-for-livelihood-127646456.html
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