Wednesday, August 5, 2020

फैक्ट्रियाें में हुआ उत्पादन शुरू, लाॅकडाउन के बाद स्थिर हुए किराना सामग्री के दाम

लाॅकडाउन की शुरुआत में मार्च, अप्रैल में जहां दैनिक जरूरताें के सामान के दाम तेजी से बढ़े थे, अब अनलाॅक-2 के पांचवें महीने में स्थिर हाे गए है। अनलाॅक हाेने के बाद व्यवस्थाएं सुचारू हुई। साेशल डिस्टेंस के साथ फैक्ट्रियाें में उत्पादन शुरू हुआ। नतीजा यह हुआ कि अब धीरे-धीरे माल की आपूर्ति हाेने लगी है। आटा, दाल, खाद्य तेल, फलीदाने जैसी राेज की जरूरत के सामान के दाम लाॅकडाउन के पहले जैसे हाे गए हैं।
किराना व्यापारी मानते हैं कि वाहनाें की आवाजाही शुरू हाेने और कारखाने शुरू हाेने से सप्लाई में आई रुकावट दूर हुई है। किराना व्यापारी रवींद्र गाेरे ने बताया लाॅडाउन की शुरुआत में वाहनाें की आवाजाही नहीं हाे पा रही थी। अब डिमांड की पूर्ति तेजी और समय पर हाे रही है। इसीलिए वस्तुओं के दाम कम हुए हैं। लाॅकडाउन में ट्रांसपाेर्ट सुविधा बंद हाेने, फैक्ट्रियाें से मजदूर चले जाने से सप्लाई थाेड़ी प्रभावित हुई थी, लेकिन रेट पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा था।
सप्लाई बराबर नहीं हाेने से बढ़े थे दाम
व्यापारियाें की मानें ताे डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम हाेने से लाॅकडाउन की शुरुआत मेें रेट बढ़ गए थे। निर्माता कंपनियाें की और से माल नहीं आ रहा था। जिन लाेगाें के पास स्टाॅक था उन्हाेंने दाम बढ़ा दिए थे। अब सप्लाई बराबर हाेने लगी है ताे दाम सही हाे गए हैं।
सुपारी के दाम 750 रुपए की कमी आई
लाॅकडाउन खुलने के बाद सुपारी के दामाें में 750 रु. तक की कमी आई है। व्यापारी गाेरे के मुताबिक लाॅकडाउन के समय सुपारी 1400 रु. प्रति किलाे थी, जाे अब 650 रु. प्रति किलाे बिक रही है।
रेट बढ़ने के ये थे कारण
लाॅकडाउन के शुरुआत में वाहनाें के चलने पर राेक थी। इस कारण माल छाेटी दुकानाें तक नहीं पहुंच पा रहा था।

  • गांव व आसपास के क्षेत्राें की दुकानाें काे हमेेशा की तरह सामान देने की बजाय थाेक विक्रेता खुद ही माल बेचने लगे थे।
  • आवश्यक वस्तुओं में किराना शामिल रहा, लेकिन छाेटी दुकानाें पर सामान नहीं हाेने से सभी लाेेग थाेक व बड़े दुकानदाराें पर ही निर्भर रहे, इसका भी रेट पर असर पड़ा।
  • पहले केवल मुख्य सड़क से दूर की दुकानाें काे शुरुआत में खाेलने की अनुमति थी, लेकिन बाद में मुख्य सड़क की दुकान खाेलने की परमिशन देने के साथ ही मेन मार्केट पूरा खाेल दिया गया।
  • फैक्ट्रियां बंद थी, मजदूर भी नहीं आ रहे थे। अब फैक्ट्रियां भी शुरू हाे गई हैं इससे प्राेडक्शन भी पर्याप्त हाे रहा है।


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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/dhar/news/production-started-in-factories-prices-of-grocery-materials-stabilized-after-lockdown-127589909.html

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