Saturday, August 22, 2020

निजी अस्पताल फुल, एक-एक बेड व वेन्टिलेटर के लिए संघर्ष मेडिकल में सुविधा, पर इलाज की मारा-मारी, आने वाला समय होगा बहुत कठिन

भास्कर टीम| जबलपुर| अभी तक यही पता था कि दिल्ली और मुम्बई जैसे महानगरों में ही कोविड मरीजों को एक-एक बेड के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन अब यही स्थिति जबलपुर में देखी जा सकती है। आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम मरीजों को निजी अस्पतालों में एक-एक बेड या आईसीयू या वेन्टिलेटर के लिए जो जद्दोजहद करनी पड़ रही है, उससे पता चल रहा है कि आने वाला समय जबलपुर के लिए बहुत कठिन है और उसका फिलहाल कोई हल नहीं है। कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल के अभाव में अब हर वर्ग के मरीज की दुर्दशा होना तय है।

  • शहर के व्यावसायिक क्षेत्र में रहने वाले एक मरीज को हृदय संबंधी समस्या के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। चार दिन बाद शनिवार को वो पॉजिटिव पाए गए। उनकी बेटी ने हर निजी हॉस्पिटल के दरवाजे खटखटाए। एक में बेड नहीं था, दो ने साफ कह दिया कि उनके पास आईसीयू नहीं है। दिन भर परेशान होने के बाद जब वो मेडिकल का रुख करने वाले थे तो एक हाॅस्पिटल में किसी का खाली हुआ बेड मिल गया।
  • एक अन्य व्यवसायी अपने पिता के लिए पिछले 5 दिनों से बेड खोज रहा है। एक निजी हॉस्पिटल में उसके पिता की हालत दिन-प्रतिदिन गिरती गई। उन्हें वेन्टिलेटर पर रखा गया है। पुत्र अपने पिता को बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाना चाहता है, लेकिन अब हालात ऐसे नहीं बचे। जबलपुर के ही एक बेहतर रिजल्ट वाले निजी हॉस्पिटल में शिफ्ट करने उसने भरसक प्रयास किए, लेकिन जब बेड मिला तो वेन्टिलेटर के कारण वहाँ ले जाना संभव नहीं रहा।
  • एक विधायक के करीबी के दो परिजन पॉजिटिव आ गए। विधायक ने काफी जोर मारा, लेकिन मनचाहे निजी अस्पताल में बेड नहीं मिल पाया। विधायक ने अस्पताल के मालिक से कहा, जवाब मिला कि आप खुद निरीक्षण कर लीजिए, बेड है ही नहीं। नतीजतन दूसरे निजी अस्पताल में कम सुविधाओं के बीच दोनों मरीजों को भर्ती करना पड़ा। इससे एक दिन पहले एक अन्य विधायक के करीबी को भी कोविड पॉजिटिव होने पर बेड नहीं मिला था।
  • एक ख्यातिलब्ध व्यक्ति को पॉजिटिव पाए जाने पर एयर एम्बुलेंस ने दिल्ली ले जाने से मना कर दिया तो जबलपुर लाया गया। फिर काफी कोशिशों के बाद भी जब यहाँ बेड नहीं मिला तो मेडिकल के सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में भेजा जाने लगा। इसकी जानकारी एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मिली, उन्होंने अपने मातहतों को लगाया, फिर भी बेड नहीं मिला। अंतत: उन्हें खुद प्रयास करने पड़े तब जाकर एक निजी अस्पताल में उनका इलाज प्रारंभ हो सका।

जबलपुर पर ज्यादा दारोमदार
3 हजार से अधिक लोग जबलपुर में कोविड पॉजिटिव आ चुके हैं और करीब 8 सौ एक्टिव केस हैं, लेकिन जबलपुर यहीं तक सीमित नहीं है। रीवा, शहडोल और सागर संभागों के जिलों के मरीजों के लिए हायर हैल्थ सेंटर के नाम पर जबलपुर ही एकमात्र ऐसा केन्द्र है, जहाँ उन्हें इलाज मिलता है। सागर संभाग के कुछ जिलों के लिए भोपाल और जबलपुर संभाग के छिन्दवाड़ा, सिवनी जिलों के लिए नागपुर भी सर्वसुविधायुक्त महानगर हैं, लेकिन इन दोनों महानगरों में कोविड के प्रकरण पहले से ही इतने अधिक हैं कि सभी को जबलपुर ही बेहतर नजर आता है। ऐसी परिस्थितियों में जबलपुर के निजी हॉस्पिटल फुल हो चुके हैं, खासकर आईसीसीयू और वेन्टिलेटर, और आने वाले समय में यदि नए प्रकरणों की रफ्तार कम नहीं हुई तो जानकारों का मानना है कि महामारी कहर ढा देगी।

भोपाल, इन्दौर से नहीं लिया सबक
मध्य प्रदेश का पहला कोविड पॉजिटिव भले ही जबलपुर में निकला था, लेकिन कोविड प्रकरणों की रफ्तार इन्दौर, भोपाल और उज्जैन में तेज थी और सरकार ने वहाँ कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बना दिए थे। इस वजह से वहाँ चाहे वीआईपी मरीज हो या फिर आम मरीज, सभी को केटेगरी के अनुसार वहाँ इलाज मिलने लगा तो ज्यादा समस्याएँ नहीं आईं। जबलपुर में भी यही माँग उठी तो प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज स्थित कैन्सर इंस्टीट्यूट को कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाने की घोषणा कर डाली, पर इस पर अमल नहीं हो सका। दूसरे प्रभावित शहरों से सबक न लेने से हालात बिगड़ने लगे और न जाने कहाँ-कहाँ कोविड के मरीज रखे गए हैं।

लापरवाही: मेडिकल का ग्राफ गिरा, अब मरीज भगवान भरोसे

प्रारंभ में मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर के सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में ही मरीज रखे जा रहे थे। यहाँ के बेहतरीन रिकवरी रेट का उदाहरण पूरे प्रदेश में दिया जा रहा था, पर अचानक ग्राफ गिर गया है। मरीजों और उनके परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि अब सीनियर डॉक्टर कोविड वार्ड का राउंड तक नहीं लेते। एकाध जूनियर डॉक्टर दिन में एक बार आते हैं। नर्स और वार्ड ब्वाॅय भी एक ही चक्कर लगाते हैं। मरीजों को एक तरह से भगवान भरोसे छोड़ा गया है। अब जबकि मरीज रोज बढ़ रहे हैं और निजी अस्पताल फुल हैं तो स्वाभाविक तौर पर मेडिकल को अपनी पुरानी प्रतिष्ठा फिर प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी होगी।

प्राइवेट हॉस्पिटल फुल, मरीज लौटाए
प्रशासन ने मरीजों की संख्या बढ़ते देख प्राइवेट हॉस्पिटलों में मरीज भर्ती करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी, पर कुछ ही निजी अस्पताल इसके लिए तैयार हुए और शनिवार को सब फुल थे और मरीजों को लौटा रहे थे। निजी अस्पतालों की अपनी सीमाएँ हैं। सभी मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल हैं अर्थात् सभी बीमारियों के मरीज वहाँ रखे जाते हैं, इस कारण कोरोना मरीजों के लिए सीमित बिस्तर, आईसीयू और वेन्टिलेटर उपलब्ध हैं, जिसके कारण अब मारा-मारी की स्थिति बनने लगी है, जो आने वाले समय में भयावह हो जाएगी।



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Âमेडिकल सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल


source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/private-hospital-full-struggle-for-each-bed-and-ventilator-facility-in-medical-but-treatment-was-killed-the-time-will-be-very-difficult-127643229.html

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