बाबई के खिड़िया गांव में मुक्तिधाम नहीं हाेने के कारण गांव के एक परिवार काे अंत्येष्टि के लिए होशंगाबाद राजघाट आना पड़ा। रविवार काे लीलाधर विश्वकर्मा की वृद्ध मां हीरामणि विश्वकर्मा (72) का निधन हाे गया था। लेकिन गांव में मुक्ति धाम नहीं हाेने के कारण उनका अंतिम संस्कार होशंगाबाद राजघाट पर करना पड़ा। सरकार की गांवाें में मुक्तिधाम बनाने की याेजना के तहत खिड़िया गांव में अभी तक मुक्ति धाम का निर्माण नहीं हुअा है। इस कारण ग्रामीणों काे नांदनेर में नर्मदा तट पर अंतिम संस्कार करने जाना पड़ता है। बाबई जपं सीईओ पूनम दुबे ने बताया कि हमने भूमि के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा है। हमें जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। जमीन मिलने के बाद मुक्ति धाम का निर्माण किया जाएगा। तहसीलदार अालाेक पारे ने कहा कि इस विषय की जांच करवाएंगे, यदि जमीन हाेगी ताे दी जाएगी। पूर्व सरपंच नानकराम मीना ने बताया कि पूर्व में करीब 2010 तक तालाब किनारे ग्रामीण अंतिम संस्कार करते थे। लेकिन सीमांकन हाेने के बाद यह जमीन आदिवासी वर्ग के लोगों के स्वामित्व में चली गई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/muktidham-not-in-khidiya-funeral-of-old-lady-in-hoshangabad-127646465.html
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