बीना के ग्राम पीपलखेड़ी में यूफ्रेशिया भवन (निर्मल ज्योति कॉन्वेंट की संस्था) में कुछ बालिकाओं को अवैध रूप से रखे जाने और जबरदस्ती ईसाई धर्म की प्रार्थना कराए जाने के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग दिल्ली के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने ऑनलाइन सुनवाई की। पेशी में कलेक्टर दीपक सिंह को पेश होना था।
लेकिन उन्होंने कोविड-19 की एक बैठक होने की वजह बताते हुए पेशी में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला परियोजना अधिकारी भरत सिंह राजपूत को भेज दिया। आयोग ने इस पर कड़ी आपत्ति लेते हुए राजपूत को फटकार लगाई।
आयोग ने डीपीओ की उपस्थिति को मान्य नहीं किया। आयोग का कहना था कि पेशी में उपस्थित होने के लिए डीपीओ को अथॉरिटी नहीं है। कलेक्टर को सोमवार को पेश होने का अवसर दिया है। यदि कलेक्टर सोमवार को आयोग के समक्ष ऑनलाइन होने वाली पेशी में नहीं आते तो उन्हें दिल्ली तलब किया जाएगा।
मामला धर्मांतरण का केस दर्ज किया आपदा नियंत्रण कानून के तहत
आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि मामले के संबंध में हालांकि कलेक्टर ने एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई है। लेकिन प्रथम दृष्टया वह संतोषजनक नहीं है। बच्चों ने धर्मांतरण कराने की शिकायत की है, जबकि पुलिस ने आपदा नियंत्रण कानून की धाराओं के तहत संबंधितों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
यदि बीमारी का सही इलाज नहीं किया जाएगा तो नहीं चलेगा। मामले में भारत के संविधान के अनुच्छेद 28(3) का उल्लंघन किया गया है। जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार इस मामले में कार्यवाही नहीं करती है तो आयोग संज्ञान लेकर कार्रवाई कराएगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/collector-had-to-be-presented-at-national-childrens-commission-hearing-sent-to-dpo-reprimanded-127646463.html
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