देश के बड़े हिस्सों में बात जब एक्सप्रेस हाईवे और 6-8 लेन सड़क तक पहुँच गई है, इस दौर में लखनादौन से जबलपुर और आगे रीवा तक 286 किलोमीटर का हिस्सा फोरलेन तो कर दिया गया पर इसमें गति के साथ सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसकी वजह बिल्कुल साफ है कि इसके किनारे के हिस्सों में कब्जे बहुत तेजी से हो रहे हैं। फोरलेन सड़क को बाँटने के लिए जो डिवाइडर, सर्विस रोड पर जालियाँ लगी होनी चाहिए उनमें कई जगह अनदेखी हो रही है। बरगी के आसपास तो अच्छी खासी आबादी वाले गाँवों में सड़क पर जालियाँ नहीं लगाई गई हैं। बरगी बायपास में तो अतिक्रमण पूरी फोरलेन सड़क को एकदम चौपट करने पर अमादा हो गये हैं। सड़क के किनारे के हिस्सों से लेकर बीच के हिस्से तक यहाँ वाहन पार्क किए जा रहे हैं। बढ़ते अतिक्रमण व आवारा जानवरों की वजह से दुर्घटनाओं का अंदेशा भी इस नई सड़क के हिस्से में ज्यादा बढ़ गया है।
इधर अंधमूक बायपास से पनागर बायपास के हिस्से तक करीब 10 किलोमीटर में जालियों से सर्विस रोड को बाँट तो दिया गया है पर ये जालियाँ टूटी रही हैं। कुछ हिस्सों में इन्हें चोरी भी कर लिया गया है। जालियाँ लगने के बाद इनकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो साथ ही सड़क निर्माण, रखरखाव और सुधार के लिए आगे अभी बड़ी चुनौती है। अभी फिलहाल बरगी के आसपास के गाँवों में दुर्घटना से बचने बड़े हिस्सों में जालियाँ लगना बेहद जरूरी हो गया है। अवैध कब्जे, अतिक्रमण यहाँ पर बड़ी समस्या बनने वाले हैं।
इस मार्ग पर आवारा जानवर बीच सड़क पर ही जमा हो जाते हैं। इससे दिन और रात दोनों ही समय हादसों का हर पल खतरा बना रहता है। आवारा जानवरों की वजह से वाहन चालक मार्ग पर तेज गति से नहीं चल सकता। रात के समय अँधेरे में तो यह खतरा कई गुना और बढ़ जाता है। हालात ऐसे हैं कि हाईवे के इस हिस्से में आवारा जानवर बीच सड़क पर कब्जे के साथ तकलीफों को बढ़ा रहे हैं।
बरगी बायपास और उससे लगे आगे के गाँवों तक जालियाँ न लगी होने की वजह से दोनों ओर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। अगर वाहन तेज गति से आ रहा है तो वह दुर्घटना का शिकार तक हो सकता है। ग्रिल, जालियाँ लगाकर कुछ हद तक कब्जों से व आवारा जानवरों से सुरक्षा तो की ही जा सकती है पर ऐसा लगता है जैसे इस विषय पर सोचा ही नहीं गया है। जरूरी प्रबंध कर बड़ी सड़क पर सीधे आने वाले वाहनों को रोका जा सकता है पर यहाँ देखकर ऐसा लगता है कि सबकी अनदेखी की जा रही है।
आगे चौड़ाई में फिर स्थायी बाधा
इस मार्ग पर सड़क के किनारे अलग-अलग जगहों पर 10 से 15 फीट तक एनएचएआई की जमीन पर कहीं गुमटियाँ लगा ली गई हैं तो कहीं पर अच्छा खासा निर्माण चल रहा है। ये खतरनाक तो हैं साथ ही भविष्य में जिस सड़क को चौड़ा किया जा सकता है उसमें ये बाधा बनने वाले हैं। इनको रोका न गया तो अच्छी खासी सड़क का कबाड़ा हो सकता है।
15 सालों तक हो सकती है वसूली
इस मार्ग पर टोल की वसूली आने वाले 15 सालों तक हो सकती है। इसके बाद जब सड़क पूरी तरह से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया के पास पहुँच जाएगी, तो 40 फीसदी वसूली होगी जो मरम्मत और सुधार के लिए होगी। इस तरह अभी कम से कम डेढ़ दशक तक इसमें चलने के दौरान आदमी को अच्छा खासा पैसा देते रहना पड़ेगा। निर्माण लागत निकल जाने के बाद इसका आकलन किया जाता है, उसके बाद वसूली जारी रखना है या नहीं इसका निर्णय सड़क परिवहन मंत्रालय लेगा। टोल देने पर बेहतर सुविधा मिले यही आम आदमी की अपेक्षा भी है। पी-2
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/lakhnadoun-jabalpur-rewa-contests-on-both-sides-of-the-forelane-127593455.html
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