कहावत है कि ढूंढने से भगवान भी मिल जाते है। वह तो फिर भी आरोपी है। पुलिस आरक्षक ने इसी बात को टारगेट कर 37 साल से फरार आरोपी फत्तू पिता अफजल निवासी दुबे कॉलोनी फकीर मोहल्ला को गिरफ्तार किया। पुलिस थाने के जरायम में आरोपी का रिकार्ड भी नहीं बच पाया।
स्थायी वारंटी की गिरफ्तारी के लिए टीआई बीएल मंडलोई ने यह काम आरक्षक रफीक खान को दिया। आरक्षक ने आरोपी फत्तू की हिस्ट्री निकाली। बताए गए पते पर उसके भाइयों से मिलकर गिरफ्तारी देने का आग्रह किया। भाइयों ने कहा कि हमें पता नहीं फत्तू कहां है। वह तो 30-35 साल से फरार है। आरक्षक ने आरोपी के भाइयों पर मुखबिर लगाए। जिससे यह पता चला कि फत्तू जिंदा है और वह इंदौर के खजराना में अपनी पत्नी के साथ रहता है। खंडवा भी आता-जाता है। रफीक अपने आरक्षक साथी अनिल बाछने के साथ इंदौर पहुंचे। बूढ़े हो चुके फत्तू को पहचानना मुश्किल हो गया था। इस दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि फत्तू नाम का आदमी खंडवा वाली रेशमा का पति है। आरक्षक आरोपी के घर पहुंचे। रेशमा ने आरक्षकों का हुलिया देखकर मना कर दिया। तभी आरक्षक रफीक ने फत्तू की आवाज लगाई तो उधर से आवाज आई बोलो भाई क्या काम है। इस तरह फत्तू की शिनाख्त हो गई। आरोपी को उसके अपराध के बारे में आरक्षकों ने बताया तो वह कहने लगा कि मेरा तो केस खत्म हो गया है। बाबू (लिपिक) को 1500 रुपए दिए थे। भाइयों से विवाद के कारण खंडवा नहीं जाता हूं। पुलिस उसे इंदौर से गिरफ्तार कर खंडवा ले आई। शनिवार दोपहर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया।
मामला : 21 साल की उम्र में व्यापारी के घर लूट की थी
आरोपी ने 1983 में 21 साल की उम्र में अपने एक साथी रमेश के साथ अंजनी टॉकिज क्षेत्र में एक व्यापारी के घर लूट की थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अपराध क्रमांक 538/83 के तहत आईपीसी की धारा 394, 34 में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। कुछ समय जेल में रहने के बाद आरोपियों की जमानत हो गई। तभी से आरोपी फत्तू फरार था।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/robbed-at-the-age-of-21-in-1983-police-arrested-and-sent-to-jail-accused-absconding-for-37-years-arrested-again-at-age-58-127646420.html
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