Saturday, August 22, 2020

जबलपुर में तीन संभागों के 17 जिलों का लोड, बाहर से आने वालों में डेथ रेट ज्यादा, 15% मरीजों ने दम तोड़ा

जबलपुर में कोरोना वायरस के नियंत्रण को लेकर संसाधन वैसे ही कम हैं, इस पर बाहर से आने वाले पेशेंट्स इस चुनौती को और बढ़ा रहे हैं। ऐसे कोविड पेशेंट्स जो बाहर से आ रहे हैं उनमें मौत की दर भी ज्यादा है। इसकी वजह यही है कि मरीज 200 से 250 किमी का सफर कर यहाँ पहुँचते हैं, इस लंबे सफर के दौरान उन्हें उतनी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जितनी लंग्स के लिए जरूरी होती है। वहाँ के जिम्मेदार मरीज की व्यवस्था या अवेयर किये बिना ही उन्हें रवाना कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। अभी तक के संक्रमण काल में शहर में 17 जिलों से मरीज आ चुके हैं, जिनकी डेथ रेट 15 प्रतिशत है। विशेषज्ञ चिकित्सक कहते हैं कि व्यवस्था की जिम्मेदारी जिसकी भी है, लेकिन मरीज की सेहत के लिहाज से यह बहुत ही खतरनाक स्थितियाँ हैं। बाहर से आने वाले मरीजों में ज्यादातर 60 साल से अधिक उम्र के हैं। इसमें भी यह देखा जाता है कि मरीज कई दिनों तक कोविड से संघर्ष करता रहा, न समय पर जाँच कराई न इलाज लिया जब हालत बिगड़ी तो सीधे जबलपुर रवाना कर दिया गया।

इस वजह से जान बचना मुश्किल | कोरोना वायरस से जूझ रहे ऐसे पीड़ित जिनको साँस लेने में परेशानी है, उनको प्रति मिनट 40 लीटर आॅक्सीजन का इनफ्लो चाहिए होता है। रास्ते में आने के दौरान इतनी आॅक्सीजन मिलना कठिन होता है। सामान्य मरीज को 8 से 10 लीटर का इनफ्लो ही दिया जाता है। मरीज गंभीर है तो साँस लेने में परेशानी हुई, लंग्स जाम हुए और 15 फीसदी इन स्थितियों में अस्पतालों में आते ही दम तोड़ देते हैं।
इनके लिए जबलपुर उम्मीद की किरण| रेफर होकर आने वाले मरीजों के लिए जबलपुर बड़ी आशा की किरण है। स्थानीय स्तर पर संसाधन बढ़ें यह तो जरूरी है साथ ही जबलपुर जहाँ पर कोविड इलाज को लेकर ज्यादा भार है वहाँ संसाधन और ज्यादा बढ़ना बेहद आवश्यक है। आसपास के डेढ़ दर्जन से अधिक जिलों के मरीजों की बेहतर इलाज को लेकर आखिरी उम्मीद जबलपुर से ही होती है।
पी-3

यहाँ से आ रहे पीड़ित
रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, छतरपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सिवनी, नरसिंहपुर, कटनी, डिण्डौरी, मण्डला, सिंगरौली, सीधी, बालाघाट कुल 17 जिले ऐसे हैं जहाँ से कोविड पीड़ित आ रहे हैं। केवल छिंदवाड़ा और सिवनी से कुछ पेशेंट नागपुर जा रहे हैं, कुछ जबलपुर आ रहे हैं। सागर के भी कुछ पेंशेट जबलपुर तो कुछ भोपाल जाते हैं।



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Load of 17 districts of three divisions in Jabalpur, death rate higher among those coming from outside, 15% patients died


source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/load-of-17-districts-of-three-divisions-in-jabalpur-death-rate-higher-among-those-coming-from-outside-15-patients-died-127643239.html

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