बड़वाह | आध्यात्मिक चिंतन मनन से हमारे जीवन का वास्तविक विकास होता है। जैन दर्शन का मात्र एक संदेश आचरण में उतार लेने से हमारा कल्याण संभव है। चातुर्मास काल के दौरान संतो ने जो धार्मिक प्रेरणा दी है उसे हम अपने जीवन में उतारकर उसे सार्थिक बनाए। जानकारी के अभाव में श्रावक-श्राविकाएं असाधना कर देते हैं। परस्पर चातुर्मास क्षमा याचना कार्यक्रम पर हुई धर्मसभा में महासती शील गुणा जी कहा। धर्मसभा में श्वेतांबर जैन संघ के प्रमुख सलाहकार प्रदीप सेठिया ने विचार व्यक्त किए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/khargon/news/mp-news-our-welfare-is-possible-by-taking-only-one-message-of-jain-philosophy-in-practice-063609-5974813.html
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