जंगल में जिस जनजाति समाज के जो लोग दिसंबर 2005 के पहले से काबिज हैं उन्हें वन अधिकार पाने का अधिकार है। वन अधिकार कानून 2005 के तहत जिन आदिवासियों ने दावे प्रस्तुत किए थे और जो कारणवश निरस्त हो गए, ऐसे लोगोें को वनवासी कल्याण परिषद उनका अधिकार दिलाने का प्रयास करेगी। संबंधित लोग अपने दस्तावेज संस्था की तहसील या जिला इकाई को प्रस्तुत कर सकते हैं।
वनवासी कल्याण परिषद मध्य भारत जिला खंडवा के खालवा ब्लाक की दिदम्दा इकाई के मुंडीघाट आश्रम में आयोजित बैठक में यह बात परिषद जिलाध्यक्ष रामजीवन गंधवाने ने कही। उन्होंने कहा निरस्त दावों को पुन: प्रस्तुत कर जांच के लिए शासन और प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। परिषद का प्रयास होगा कि जल्द ही आपको आपका अधिकार मिले। परिषद उपाध्यक्ष रामप्रसाद कवड़े ने कहा वन अधिकार कानून के तहत जिन लोगों के दावे निरस्त हुए हैं वे आवश्यक दस्तावेज के साथ वन अधिकार ग्राम समिति, तहसील समिति व जिला समिति खंडवा को प्रस्तुत कर सकता है। संगठन पट्टे दिलाने में हर स्तर पर संघर्ष करेगा। परिषद संगठन मंत्री ब्रजलाल ढाकरे ने उपस्थित आदिवासियों को वन अधिकार कानून, पट्टे पाने की प्रक्रिया और अन्य योजनाओं का लाभ लेने की विस्तार से जानकारी दी। परिषद कोषाध्यक्ष ऋतुराज पांडे ने कोविड-19 से बचाव के उपाय बताए। बैठक में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। बैठक मंे संत श्री राम मुनि महाराज उदासीन अखाड़ा, शेरसिंह बड़ोले, गोविंद पाटिल, निर्भय उइके, अमृतलाल धुर्वे, मंशाराम इवने, मोटेलाल उइके, रतीलाल भास्कर सहित परिषद की ब्लाक इकाई के सभी पदाधिकारी, सदस्य व ग्रामीण उपस्थित थे।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/council-will-help-in-getting-the-forest-rights-lease-127649844.html
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