Monday, August 10, 2020

39 वर्ष पुरानी परंपरा न टूटे, इसलिए मंदिर से पाटी रोड तक निकाला गया शिवडोला

पाटी रोड स्थित श्रीरामकुल्लेश्वर मंदिर से शिवडोला निकाला गया। लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से पूरे शहर में निकालने की बजाय मंदिर से पाटी रोड तक ही निकाला गया। पूजन, हवन और शृंगार पहले की तरह किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रीरामकुल्लेश्वर के दर्शन दूर से ही किए। कोरोना महामारी से बचाव और परंपरा न टूटे, इसलिए औपचारिक रूप से शिवडोला निकाला गया। आयोजनकर्ताओं ने बताया शहर में 39 साल पहले शिवडोला निकालने की परंपरा शुरू हुई थी। पहली बार ऐसा हुआ की श्रीरामकुल्लेश्वर ने पूरे शहर का भ्रमण नहीं किया।

आयोजनकर्ताओं ने बताया दोपहर में श्रीरामकुल्लेश्वर का अभिषेक कर शृंगार किया गया। करीब दो घंटे तक हवन हुआ। शाम 4 बजे मंदिर से शिवडोला की शुरुआत हुई। श्रीरामकुल्लेश्वर को पालकी में बैठाया गया। जिसे श्रद्धालु लेकर चले। वहीं बैंड-बाजों की धुन पर श्रद्धालु नाचते हुए नजर आए। सुरक्षा की दृष्टि से श्रीराम कुल्लेश्वर मंदिर से लेकर पाटी नाका तक जगह-जगह पुलिस जवान तैनात थे। व्यवस्थाएं संभालने के लिए एसडीओपी अंतरसिंह जमरा, तहसीलदार राजेश पाटीदार, थाना प्रभारी राजेश यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

दो हजार गुलाबों से सजाई थी पालकी

श्रीरामकुल्लेश्वर जिस पालकी में विराजमान थे। उसे सजाने में करीब 5 घंटे का समय लगा था। पालकी में दो हजार से ज्यादा गुलाब के फूल लगाए गए थे। इसके अलावा मोगरा और अन्य प्रजाति के फूल लगाए थे।

जनप्रतिनिधि भी हुए कार्यक्रम में शामिल

शिवडोला में शामिल होने के लिए पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल, सांसद गजेंद्रसिंह पटेल, नपाध्यक्ष लक्ष्मण चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही शिव डोला निकालने के दौरान भी श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंस का पालन किया।

पिछले साल ऐसा था शिवडोला का स्वरूप

पिछले साल शिवडोला में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए थे। श्रीरामकुल्लेश्वर ने करीब 10 घंटे शहर का भ्रमण कर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए थे। पांच से ज्यादा राज्यों के कलाकारों ने प्रस्तुति दी थी। 15 से ज्यादा डीजे शामिल हुए थे। साथ ही 50 से ज्यादा स्थानों पर शिवडोले का स्वागत किया गया था। श्रीरामकुल्लेश्वर ने पूरे शहर का भ्रमण किया था।



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39 years old tradition is not broken, so Shivdola was removed from the temple to Pati Road


source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/barwani/news/39-years-old-tradition-is-not-broken-so-shivdola-was-removed-from-the-temple-to-pati-road-127606745.html

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