बीएमसी में एक कोरोना संदिग्ध के सैंपल की रिपोर्ट नहीं दिए जाने से परेशान होकर उसके बेटे ने पीएमओ तक शिकायत कर दी। हालांकि सोमवार दोपहर को इस संदिग्ध की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आना बताया जा रहा है। घटनाक्रम इस तरह से है कि सदर निवासी एक अधेड़ किराना दुकानदार 20 मई को बुखार व खराश की शिकायत लेकर टीबी अस्पताल पहुंचा था।
वहां सैंपलिंग कर उसे बीएमसी में आइसोलेट कर लिया गया। दो दिन बाद 22 मई को अस्पताल के डॉक्टर्स ने इस मरीज को मौखिक बताया कि आप की रिपोर्ट निगेटिव है। कुछ मिनट बाद रिपोर्ट की पुष्टि आईसीएमआर पोर्टल द्वारा मरीज के मोबाइल पर भी कर दी गई। लेकिन डॉक्टरों ने ये भी कहा कि अभी आपको तकलीफों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती रखा जाएगा। इसके बाद इस मरीज को जिला अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। यह कोरोना संदिग्ध कुछ घंटे ही जिला अस्पताल में रह पाया कि इसी बीच टीबी अस्पताल से कुछ लोग आए और इस मरीज के परिजन से कहा कि आप की रिपाेर्ट पॉजिटिव है, इसलिए तुरंत टीबी अस्पताल चलें। ये मरीज घबराया हुआ टीबी अस्पताल पहुंच गया। इसके बाद से इस मरीज के बेटे ने अस्पताल के डॉक्टर से लेकर डीन तक सभी से अपने पिता की दूसरी रिपोर्ट मांगी, ताकि ये कनफर्म हो जाए कि वे पाॅजिटिव हैं या नहीं।
लेकिन टीबी अस्पताल के प्रबंधन व कोविड जांच लैब ने 24 मई तक कुछ भी नहीं बताया। इससे परेशान होकर मरीज के बेटे ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर और टीबी अस्पताल के इंचार्ज डॉ. तल्हा शाद को मेल व ट्विटर पर शिकायत दर्ज कराई। लेकिन बात तब भी नहीं बनी।
इसी दौरान मीडिया ने भी इस मामले में डीन डॉ. पटेल से जवाब मांगा लेकिन वे भी टाल-मटोल करते रहे। आखिरकार 25 मई की दोपहर को कोविड हॉस्पिटल प्रबंधन ने ये रिपोर्ट सरकारी पोर्टल पर डालते हुए परिजनों को बताया कि आपका मरीज पॉजिटिव है।
इस मामले में पीड़ित के शिकायतकर्ता पुत्र का कहना है कि ये गंभीर लापरवाही है। मेरे पिता को पांच दिन में तीन अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती रखा गया। दो बार परीक्षण के नमूने लिए गए। तीन अलग-अलग रिपोर्ट दी गई।
इस लापरवाहीपूर्ण चिकित्सकीय व्यवहार से मेरे पिता को गंभीर मानसिक आघात पहुंचा है। अगर मेरे पिता पहले से ही कोरोना पॉजिटिव थे तो उन लोगों के लिए कौन जवाबदेह होगा जो उनके साथ जिला अस्पताल में भर्ती रहते हुए अपना उपचार करा रहे थे। इन मरीजों के अटैंडर्स व नर्सिंग स्टाफ को भी खतरा है। अगर मेरे पिता निगेटिव थे तो अवश्य वे टीबी अस्पताल में अनावश्यक भर्ती रहने के कारण पॉजिटिव हो गए। इसकी भी जवाबदेही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को लेना होगी।
डॉ. जीएस पटेल, डीन,बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर ने कहा-जिला अस्पताल मेंभर्ती रहे मरीजों कीजांच होना चाहिए
पहले सैंपल में सही मात्रा में सलाइवा नहीं लिए जाने के कारण रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन डॉ. शाद ने देखा कि इस मरीज के फेंफड़े मेें संक्रमण है और उसका दोबार सैंपल लिया जाना चाहिए। इसलिए दोबार सैंपल लिया जाे पॉजिटिव आया। जिला अस्पताल में ये मरीज जितने भी समय के लिए भर्ती रहा। वहां के मरीज व स्टाफ का भी परीक्षण जरूरी है। इस बारे में मैं जिला अस्पताल प्रबंधन से बात करूंगा। रिपोर्टिंग में देरी क्यों हुई, इसकी जांच कराएंगे।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/first-negative-re-sampling-in-doubt-report-not-given-for-four-days-son-complains-till-pmo-then-told-positive-127341107.html
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